आजकल बच्चों को लाड़-प्यार करने की आदत ने कई माता-पिता के लिए समस्याएं खड़ी कर दी हैं। सोशल मीडिया पर देश के प्रसिद्ध पीडियाट्रिशियन डॉ. मोहित सेठी ने एक वीडियो शेयर किया, जिसमें उन्होंने बच्चों को अत्यधिक लाड़ करने के खतरों पर चर्चा की। इस वीडियो में डॉ. सेठी ने एक किस्से का जिक्र किया, जिसमें एक चार से पांच साल के बच्चे को वैक्सीनेशन के दौरान पांच लोग पकड़ रहे थे। वैक्सीनेशन के बाद, बच्चे ने अपने पापा को मारना शुरू कर दिया। डॉ. सेठी ने चेतावनी दी कि माता-पिता को बच्चों को इतना लाड़ नहीं करना चाहिए कि वे उनका अनुशासन खो बैठें। आइए जानते हैं, वह 5 तरीके जिनकी मदद से आप ओवरपैंपर्ड बच्चों को सुधार सकते हैं।
बच्चों के आगे-पीछे न घूमें
डॉ. सेठी के अनुसार, बहुत से माता-पिता बच्चों को किसी भी छोटे दर्द या परेशानी पर अधिक पुचकारते हैं। बच्चों के रोने पर, वे बार-बार सॉरी बोलते हैं। यह आदत बच्चों को शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर बना सकती है। माता-पिता को बच्चों के आगे-पीछे न घूमते हुए, उन्हें सहानुभूति और प्यार देना चाहिए, लेकिन जरूरत से ज्यादा लाड़ नहीं करना चाहिए।
सही और गलत का फर्क सिखाएं
बच्चों को सही और गलत का अंतर सिखाना बेहद जरूरी है। एक्सपर्ट के अनुसार, जब बच्चा 2 से 3 साल का हो, तो वह सही और गलत का फर्क समझने में सक्षम हो जाता है। माता-पिता को बच्चों को सिखाना चाहिए कि किसी काम को क्यों किया जाना चाहिए और किसी काम को क्यों नहीं। जब बच्चा जिद्दी हो, तो उसे प्यार से समझाना चाहिए।
बच्चों के लिए सख्ती जरूरी
कई माता-पिता सॉफ्ट पेरेंटिंग की प्रवृत्ति अपनाते हैं, लेकिन डॉ. सेठी का कहना है कि इससे बच्चे अनुशासन में नहीं रहते। पेरेंट्स को शुरू से ही बच्चों के साथ सख्ती बरतनी चाहिए, ताकि वे अनुशासन में रहें और गलत आदतों से बचें। बच्चों को सही-गलत के बारे में बताने के साथ-साथ उन्हें सख्ती से समझाना भी महत्वपूर्ण है।
समझाने के लिए प्यार से समझाएं
डॉ. सेठी का कहना है कि बच्चों को समझाने के लिए किसी भी प्रकार की हिंसा या बेल्ट ट्रीटमेंट की जरूरत नहीं होती। सबसे पहले बच्चों को प्यार से समझाएं। अगर वे नहीं समझते, तो डांटने का तरीका अपनाएं। फिर भी अगर बच्चा नहीं समझे, तो उनसे बात करना बंद कर दें और उसे यह एहसास दिलाएं कि वह क्या गलत कर रहा है।
एक थप्पड़ से सिखाएं सबक
आजकल बहुत से पेरेंट्स बच्चों को थप्पड़ मारने से बचते हैं, लेकिन डॉ. सेठी का मानना है कि कभी-कभी एक थप्पड़ देना जरूरी हो सकता है। इसका मतलब यह नहीं कि बच्चों को लगातार मारना चाहिए, बल्कि यह सिर्फ एक शारीरिक प्रतिक्रिया हो सकती है, ताकि बच्चों को यह समझ में आ सके कि कुछ गलत करने पर उन्हें अपने माता-पिता का समर्थन नहीं मिलेगा।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
