असफलता, ये शब्द सुनने में ही कितना असरफ लगता है। ऐसा कि जैसे इसने कभी कुछ किया ही न हो। असल में ये सोच हमारी, आपकी, सबकी है, लेकिन असफलता आपको सफल होने के हज़ारों रास्ते दिखाती है। हर सफल आदमी हमेशा से ऐसे ही सफल नहीं रहा। उसने भी कभी न कभी असफलता का सामना किया है।

अगर आपने कभी भी असफलता नहीं देखी तो मान लीजिए आपने सही मायने में सफलता नहीं देखी। असफलता का मतलब ये नहीं कि सब खत्म हो गया, इसका मतलब है कि अभी थोड़ा और आपने आगे जाना है, फिर आपकी मंजिल आपके हाथों में। इसलिए यहां कुछ बातें बताई गईं हैं जो हर असफलता के बाद हम अपने आप को समझाने के लिए दोहराते हैं, लेकिन अगर दिल से दोहराएंगे तो असफलता वाक़ई सफलता के दरवाज़े खोल देगी।

विचारों और कारणों को लिखें

जब असफलता का आकलन किया जाता है तो तब पता लगता है कि कोई बहुत छोटी-सी कमी रह गई थी, जो आपके और सफलता के बीच आ रही थी। जब असफलता का आकलन करने बैठें तो सबसे पहले अपने दिमाग़ में आ रहे विचारों को लिख लें। हो सकता है कि शुरु में आपके विचार कुछ ज़्यादा ही नेगेटिव होंगे, पर ये नकारात्मक विचार आपको सफलता दिलवाने में मददगार साबित हो सकते हैं। जब सब चीजों से आपका दिमाग़ शांत हो जाए तो अपने असफलता के कारणों को पढ़ें।

जब आप खुद असफलता के कारणों को पढ़ेंगे तो जानेंगे कि उन कारणों को दूर करने के लिए क्या किया जा सकता है और उन्हें भी लिख लें। किसी प्रोफ़ेशनल की मदद भी ली जा सकती है तो अगली बार उन छोटी-मोटी कमियों को दूर करके प्रयास करें, यक़ीनन नतीजा बेहतर होगा।

दिनचर्या नियमित करें

अच्छी दिनचर्या का नियमित रूप से पालन करें। सूर्योदय के पहले बिस्तर छोड़ना और रात को जल्दी सो जाने से और नियमित रूप से व्यायाम करने से हमारे सफल होने की संभावना काफ़ी हद तक बढ़ जाती है। सफलता तब भी मिलती है जब सकारात्मक लोगों के संपर्क में आया जाता है। ये लोग न तो ख़ुद नकारात्मक होते हैं और न ही दूसरों को निराश रहने देते हैं। इनके साथ सुबह-सुबह जॉगिंग पर जाएं या शाम का कुछ पल इनके साथ बिताएं।

भावनाओं पर कंट्रोल

असफलता अक्सर नकारात्मक सोच को जन्म देती है। असफल होने पर सबसे पहले तो हमें खुद पर गुस्सा आता है, फिर वहीं गुस्सा आस-पास के लोगों पर निकल जाता है। इस गुस्से में हम कुछ ऐसा कह देते हैं, जिस बाद में सोचने पर पछतावा होता है। चाहते हैं कि असफलता के बाद की नकारात्मक भावनाएं आपके कंट्रोल में रहे तो सबसे अच्छा तरीक़ा है अपनी पसंदीदा चीजों को समय देना। जब आप अपनी पसंद की गतिविधियों में समय बिताते हैं, तब आपका शरीर हैप्पी हार्मोन्स स्रवित करता है, जिससे आपको अपनी नकारात्मक भावनाओं से निपटने में मदद मिलती है।

कोशिशों से ब्रेक

आपने बहुत कोशिश करी, बार-बार कोशिश करी लेकनि फिर भी कोई फायदा नहीं हो पा रहा है तो अपनी कोशिशों से थोड़ा ब्रेक ले लें। ब्रेक लेने के बाद कुछ दिनों तक उसके बारे में सोचें भी मत। और लगभग एक हफ़्ते के बाद अपने प्रयासों का स्टेप-बाय-स्टेप आकलन करें। देखें कि कहां गलती थी और क्या बदलाव हो सकता है। इसलिए असफल हो रहे हैं क्योंकि आपके तरीके पुराने ही है।

शरीर को नज़रअंदाज़ न करें

हमारा दिमाग हमें बहुत पागल बनाता है या कह सकते हैं कि हम ही अपने आप को पागल बनाते रहते हैं और उदास रहते हैं। ऐसे ही असफलता दिमाग़ी खेल है, लेकिन इस दिमाग के खेल की वजह से अपने शरीर को नज़रअंदाज़ न करें। असफलता के बारे में सोचेंगे तो उसका असर हमारे शरीर पर भी पड़ने लगता है। स्ट्रेस में होने की वजह से स्ट्रेस हार्मोन्स रिलीज़ होते हैं, जो आपके शरीर को नकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं। अगर लंबे समय से स्ट्रेस में हैं तो अपने शरीर का चेकअप जरूर कराएं। कई बार ऐसा भी होता है कि लोग स्ट्रेस में ज़्यादा खाना शुकू कर देते हैं। स्मोकिंग या ड्रिंकिंग जैसी आदतें लग जाती हैं, इसलिए भी फ़िज़िकल फ़िटनेस टेस्ट कराना ज़रूरी होता है।

By tnm

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