गर्भ निरोधक गोलियों का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं को अलर्ट रहने की जरूरत है, क्योंकि यह दवा हार्ट अटैक के खतरे को बढ़ा सकती है। एक रिसर्च में यह पाया गया है कि न सिर्फ गर्भ निरोधक गोलियां, बल्कि महिलाओं में स्मोकिंग की आदत भी हार्ट अटैक के खतरे को दोगुना कर सकती है। पी.जी.आई. (पंजाब के पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च) के कार्डियोलोजिस्ट डॉ. विजय वर्गीय के अनुसार दोनों ही चीजें खून पर अलग-अलग असर डालती हैं।
स्मोकिंग और गर्भ निरोधक गोलियों का असर
स्मोकिंग खून के प्रवाह में रुकावट डालती है, जिसके कारण खून के थक्के जल्दी बन सकते हैं। निकोटिन ब्लड प्रेशर और दिल की धड़कन को बढ़ाता है, जबकि गर्भ निरोधक गोलियां खून को गाढ़ा कर सकती हैं, जिससे ब्लड प्रेशर में वृद्धि हो सकती है। इन दोनों कारकों के कारण दिल से जुड़ी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए गर्भ निरोधक गोलियों का सेवन केवल डॉक्टर की निगरानी में ही करना चाहिए।
महिलाओं में दिल की बीमारी

पिछले कुछ सालों में दिल की बीमारियों का ट्रेंड बदल रहा है। अब सिर्फ उम्रदराज लोग ही नहीं, बल्कि 40 साल की उम्र में भी दिल की बीमारियां देखी जा रही हैं। खासकर महिलाओं में दिल की बीमारियां बढ़ रही हैं। पी.जी.आई. के आंकड़ों के अनुसार 50 वर्ष से कम उम्र की 13-15 प्रतिशत महिलाएं सी.वी.डी. (दिल से संबंधित बीमारियों) से पीड़ित थीं। एक और स्टडी में पता चला कि दिल से संबंधित बीमारी से पीड़ित 44 प्रतिशत महिलाएं मोटापे से ग्रस्त थीं, और केवल 1 प्रतिशत ने दैनिक आहार में पर्याप्त फल और सब्जियां खाई थीं। दिल की बीमारी से पीड़ित महिलाओं में मृत्यु दर 50 प्रतिशत अधिक पाई गई है।
हार्ट अटैक के लक्षण
हार्ट अटैक के शुरुआती लक्षणों को पहचानना जरूरी है, ताकि समय रहते इलाज किया जा सके। अकसर यह बीमारी गंभीर अवस्था में ही पता चलती है। हार्ट अटैक के सामान्य लक्षणों में सीने में बेचैनी और भारीपन महसूस होना शामिल है। कभी-कभी सीने में जलन भी हार्ट अटैक का लक्षण हो सकती है। सांस लेने में कठिनाई या कम चलने पर हांफना भी हार्ट अटैक का संकेत हो सकता है। सर्दियों में पसीना आना एक चिंता का विषय हो सकता है। इसके अलावा यदि हाथ बार-बार सुन्न पड़ने लगे, तो यह हार्ट अटैक या पैरालिसिस के संकेत हो सकते हैं।
