हर साल 1 दिसंबर को विश्व एड्स दिवस मनाया जाता है, जो हमें इस महामारी के खिलाफ जागरूकता फैलाने का एक अवसर प्रदान करता है। इस दिन के अवसर पर, यूएनएड्स (United Nations Programme on HIV/AIDS) ने अपनी नई रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि यदि एचआईवी को खत्म करने के लिए प्रयासों में तेज़ी नहीं लाई जाती, तो 2050 तक करीब 4.6 करोड़ लोग एचआईवी के साथ जीने को मजबूर हो सकते हैं। वर्तमान में दुनिया भर में लगभग 4 करोड़ लोग एचआईवी से संक्रमित हैं।

एड्स की रोकथाम के लक्ष्य को हासिल करने में असमानताएं बड़ी बाधा

यूएनएड्स की रिपोर्ट “टेक द राइट्स पाथ टू एन्ड एड्स” (Take the Rights Path to End AIDS) में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि 2030 तक एड्स के उन्मूलन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए वर्तमान प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। रिपोर्ट में विशेष रूप से इस बात को उजागर किया गया है कि यह महामारी अभी भी असमानताओं के कारण फैल रही है। इन असमानताओं के कारण एचआईवी से संक्रमित लोगों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सीमित हो रही है और सामाजिक एकजुटता में कमी आ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक भेदभाव, दंडित करने वाले कानून और महिलाओं, बच्चियों तथा एलजीबीटीक्यू+ समुदाय के अधिकारों का उल्लंघन एचआईवी की रोकथाम में बड़ी रुकावटें उत्पन्न कर रहे हैं।

महिलाओं और बच्चियों के प्रति भेदभाव से संक्रमण का बढ़ता खतरा

विशेष रूप से महिलाओं और बच्चियों के प्रति भेदभाव के कारण एचआईवी संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार पूर्वी और दक्षिणी अफ्रीका के 22 देशों में किशोर बच्चियों और युवा महिलाओं में एचआईवी संक्रमण की दर लड़कों और युवा पुरुषों की तुलना में तीन गुना अधिक है। इसके अलावा साथी द्वारा हिंसा का सामना करने वाली महिलाओं में एचआईवी संक्रमण का खतरा और बढ़ जाता है। यह असमानता उनके स्वास्थ्य, सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा में बड़ी बाधा बन रही है।

एलजीबीटीक्यू+ समुदाय के खिलाफ हिंसा और भेदभाव

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कई देशों में एलजीबीटीक्यू+ समुदाय के खिलाफ हिंसा और भेदभाव बढ़ रहा है। उदाहरण के लिए माली में 2023 के पहले दस महीनों में सामुदायिक समूहों ने 367 एलजीबीटीक्यू+ व्यक्तियों के खिलाफ हिंसा की रिपोर्ट की थी, जिनमें से लगभग आधे (49 प्रतिशत) ट्रांसजेंडर थे। इस प्रकार की हिंसा और भेदभाव से एचआईवी परीक्षण और उपचार तक पहुंच सीमित हो जाती है, जो एचआईवी के फैलाव को बढ़ावा देता है।

स्वास्थ्य देखभाल में भेदभाव और इलाज से बचने का डर

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि स्वास्थ्य देखभाल, स्कूलों, कार्यस्थलों और समुदायों में एचआईवी पीड़ितों के खिलाफ कलंक और भेदभाव एचआईवी उपचार और रोकथाम के उपायों को कम प्रभावी बना रहे हैं। 2020 से 2023 तक किए गए सर्वेक्षणों में पाया गया कि हर सातवें एचआईवी पीड़ित को स्वास्थ्य देखभाल प्राप्त करते समय भेदभाव का सामना करना पड़ा था। इसके परिणामस्वरूप बहुत से लोग एचआईवी परीक्षण से बचते हैं या उपचार से बाहर हो जाते हैं क्योंकि उन्हें डर होता है कि उनकी निजी जानकारी सार्वजनिक हो जाएगी।

मानव अधिकारों की रक्षा से ही होगी एड्स की समाप्ति

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यदि वैश्विक नेता एचआईवी पीड़ितों और जोखिम में रहने वाले समुदायों के अधिकारों की रक्षा करें, तो 2030 तक एड्स को समाप्त किया जा सकता है। इसके लिए आवश्यक है कि भेदभाव को खत्म किया जाए और एचआईवी पीड़ितों के लिए सुरक्षित और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जाएं। इसके अलावा इस महामारी से निपटने के लिए अब से 2030 तक हर डॉलर के निवेश पर आठ डॉलर का फायदा होगा, और 2050 तक यह लाभ बढ़कर 10.60 डॉलर हो सकता है।

अगर हम विफल रहे तो भारी आर्थिक कीमत चुकानी पड़ेगी

रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि दुनिया ने एड्स के उन्मूलन के वैश्विक लक्ष्यों को हासिल नहीं किया, तो इसका भारी आर्थिक प्रभाव पड़ेगा। रिपोर्ट के अनुसार इस पर न कार्रवाई करने की आर्थिक लागत 2050 तक 700,000 करोड़ डॉलर तक पहुंच सकती है। इसके अतिरिक्त अगर स्थिति में बदलाव नहीं आया, तो 2050 तक और 3.5 करोड़ लोग एचआईवी से संक्रमित हो सकते हैं, और एड्स से मरने वालों की संख्या 1.77 करोड़ तक बढ़ सकती है।

By tnm

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *