आजकल की स्थिती को देखा जाए तो प्रदूषण काफी बढ़ गया है। चाहे वो वायु प्रदूषण हो या जल प्रदूषण। भारत में वायु प्रदूषण से हर कोई परेशान है लेकिन खासकर ये समस्या दिल्ली में बहुत है, साथ ही यमुना नदी में इकट्ठी झाग ने भी सबको परेशान कर दिया है। अगर बात गंगा नदी की करें तो बिहार में गंगा नदी की स्थिति में सुधार नहीं हो रहा। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में बिहार सरकार द्वारा दाखिल एक रिपोर्ट से पता चलता है कि नदी के पानी में फेकल बैक्टीरिया (फेकल कोलीफॉर्म) की मात्रा इतनी ज्यादा है कि ये नहाने लायक बिल्कुल भी नहीं है।

68% से ज्यादा सीवेज नदी में बहाया जा रहा

नदी की सफाई और प्रबंधन से संबंधित मामले की सुनवाई कर रहे NGT ने बिहार में नदी की बिगड़ती स्थिति पर कड़ी नाराजगी जताई है। 68 प्रतिशत से ज्यादा सीवेज नदी में बहाया जा रहा है। साथ ही ये सुनवाई न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली एनजीटी की पीठ कर रही है, जिसने राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) को अपनी शक्तियों और प्राधिकारों का प्रभावी उपयोग करने का निर्देश दिया है। राज्यों में गंगा नदी की सफाई की जिम्मेदारी एनएमसीजी की है।

अभी के लिए सिर्फ 343 मिलियन लीटर सीवेज का उपचार किया जा सकता है, लेकिन वास्तव में पूरे बिहार में प्रतिदिन 1,100 मिलियन लीटर सीवेज उत्पन्न होता है और लगभग 750 मिलियन लीटर अनुपचारित सीवेज सीधे गंगा में बह रहा है। साथ ही राज्य में आठ में से छह सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) आवश्यक मानकों के अनुसार काम नहीं कर रहे हैं।

NMCG को उसकी शक्तियों के बारे में याद दिलाना

एनजीटी ने पाया कि एनएमसीजी अपनी शक्तियों का प्रभावी ढंग से उपयोग नहीं कर रहा है और केवल पत्राचार और बैठकों तक ही सीमित है। अपनी टिप्पणियों में, पीठ ने एनएमसीजी को उसकी शक्तियों की याद दिलाई।पीठ (बेंच) का कहना है कि गंगा (कायाकल्प, संरक्षण और प्रबंधन) आदेश 2016 की धारा 41 के तहत, एनएमसीजी के पास व्यापक अधिकार हैं। इनमें परियोजनाओं को रद्द करने, धन को रोकने और पुनर्वितरित करने, अधिकारियों या संस्थाओं को निर्देश जारी करने और अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए कार्रवाई करने का अधिकार शामिल है।

2025 तक ठोस कार्य योजना बनाने का निर्देश

एनजीटी ने एनएमसीजी को प्रदूषण नियंत्रण के लिए एक ठोस कार्य योजना बनाने और इसे 18 मार्च 2025 तक पेश करने के लिए अपनी शक्तियों का उपयोग करने का निर्देश दिया है। साथ ही, मामले की गंभीरता को देखते हुए, एनजीटी ने बिहार पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव को मामले में पक्षकार बनाया है और उन्हें अगली सुनवाई से पहले जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

By tnm

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