पॉलीफ्लोरोएल्काइल पदार्थ (पीएफएएस) एक रासायनिक समूह है, जिसका उपयोग रोज़मर्रा की वस्तुओं जैसे नॉन-स्टिक कुकवेयर, जल-प्रतिरोधी कपड़े, अग्निशमन फोम और कई औद्योगिक उत्पादों में किया जाता है। ये रसायन शरीर में जमा हो जाते हैं और इन्हें नष्ट होने में बहुत लंबा समय लगता है, जिसके कारण कैंसर, लीवर की समस्या, प्रजनन संबंधी विकार और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। एक नए अध्ययन में यह सामने आया है कि पीएफएएस से प्रदूषित पानी और भोजन का सेवन हमारे स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा बन सकता है।

पीएफएएस का बढ़ता खतरा

अमेरिका के यूएससी के केक स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक स्टडी में यह पाया गया कि पीएफएएस केमिकल्स का रक्त स्तर बढ़ने का सीधा संबंध दूषित जल प्रणालियों, भोजन और औद्योगिक प्रदूषण से है। इस स्टडी ने खाद्य पैकेजिंग, जल प्रदूषण और प्रदूषित क्षेत्रों में रहने के कारण पीएफएएस के रक्त में उच्च स्तर का खुलासा किया। यह शोध इस बात का संकेत है कि लाखों लोग प्रतिदिन बिना जानें ही इन खतरनाक रसायनों के संपर्क में आ रहे हैं, जिससे उनका स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है।

शोध का उद्देश्य और निष्कर्ष

यह स्टडी इस दिशा में किए गए पहले व्यापक शोधों में से एक है, जिसमें पीएफएएस के संपर्क और इससे होने वाले स्वास्थ्य प्रभावों का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने खून के नमूने और आवासीय पते का विश्लेषण करके यह समझने की कोशिश की कि पीएफएएस के रक्त स्तर में अंतर कैसे हो सकता है। कैलिफ़ोर्निया में किए गए स्टडी में पीएफएएस से दूषित जल क्षेत्रों में रहने वाले व्यक्तियों के खून में इन खतरनाक रसायनों के उच्च स्तर पाए गए।

दूषित जल प्रणालियों का प्रभाव

शोध के अनुसार जो लोग पीएफएएस से दूषित पानी वाले इलाकों में रहते थे, उनके खून में पीएफएएस के स्तर में काफी वृद्धि पाई गई। उदाहरण के लिए जो लोग पीएफओएस (Perfluorooctane sulfonic acid), पीएफओए (Perfluorooctanoic acid), और पीएफएचएक्सएस (Perfluorohexane sulfonic acid) जैसे रसायनों से दूषित जल का सेवन करते थे, उनके रक्त में इन रसायनों का स्तर 1.5 से 1.6 नैनोग्राम प्रति मिलीलीटर के आसपास था, जो कि सामान्य क्षेत्रों के मुकाबले कहीं अधिक था।

खाद्य पैकेजिंग से पीएफएएस का खतरा

चौंकाने वाली बात यह है कि पीएफएएस केवल पानी या औद्योगिक प्रदूषण से ही नहीं, बल्कि खाद्य पैकेजिंग से भी शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। शोध में यह पाया गया कि कम खाद्य पहुंच वाले इलाकों में रहने वाले लोगों के रक्त में पीएफएएस के स्तर अधिक थे, क्योंकि वे अधिक पैकेज्ड खाद्य पदार्थों का सेवन करते थे, जिनमें यह रसायन पाया जाता है। इन इलाकों में लोग निकटतम सुपरमार्केट से 0.5 मील से अधिक दूरी पर रहते हैं, और ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करते हैं जो पीएफएएस से प्रदूषित हो सकते हैं।

औद्योगिक स्थानों के पास रहने का असर

शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि पीएफएएस के उच्च स्तर का संबंध उन क्षेत्रों से है, जहां पीएफएएस को संसाधित या उत्पादित किया जाता है। यदि लोग इन औद्योगिक स्थानों के तीन मील के दायरे में रहते हैं, तो उनके खून में पीएफओएस, पीएफएचएक्सएस, और अन्य पीएफएएस रसायनों का स्तर अधिक पाया गया। इससे यह सिद्ध होता है कि औद्योगिक प्रदूषण के संपर्क में आने से पीएफएएस का स्तर शरीर में बढ़ सकता है।

पीएफएएस के खतरे के बारे में जागरूकता बढ़ाना जरूरी

शोधकर्ताओं का मानना है कि पीएफएएस के खतरों के बारे में लोगों को जागरूक करना अत्यंत आवश्यक है। बहुत से लोग यह नहीं जानते कि वे पीएफएएस से दूषित पानी या भोजन का सेवन कर रहे हैं। इसके अलावा शोधकर्ताओं ने यह भी सुझाव दिया है कि इस खतरे से बचने के लिए जिम्मेदारी केवल नागरिकों पर नहीं डाली जानी चाहिए, बल्कि इसके कारणों को समझते हुए पर्यावरणीय स्तर पर कार्रवाई की जानी चाहिए।

सरकारी उपाय और भविष्य की योजना

2024 से पीएफएएस को खतरनाक पदार्थों की सूची में शामिल किया जाएगा, जिससे इसके प्रभावों को नियंत्रित करने और विषाक्त कचरे की सफाई के लिए अतिरिक्त धन उपलब्ध होगा। इसके अलावा 2029 तक सार्वजनिक पेयजल में छह प्रकार के पीएफएएस के स्तरों को नियंत्रित करने के नए नियम लागू किए जाएंगे। हालांकि तब तक जल प्रणालियां अभी भी पीएफएएस से दूषित हैं, और बहुत से लोग इसे लेकर अनजान हैं।

By tnm

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