कोरोना महामारी के दौरान भारत ने मेड इन इंडिया वैक्सीन्स के जरिए वैश्विक स्तर पर अपनी एक मजबूत पहचान बनाई। अब भारत का फार्मास्युटिकल उद्योग दुनिया भर में अपनी मौजूदगी को लगातार बढ़ा रहा है। क्या आप जानते हैं कि भारत लगभग 200 देशों को दवाएं निर्यात करता है? आंकड़ों के अनुसार भारत की दवाओं का वैश्विक बाजार में दबदबा लगातार बढ़ता जा रहा है, जो आने वाले समय में और भी मजबूत होगा।
दुनिया के 200 देशों में दवाएं भेजता है भारत
फार्मास्युटिकल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया (फार्मेक्सिल) के चेयरमैन डॉ. वीरमणि के अनुसार भारत इस समय दुनिया के करीब 200 देशों को दवाएं निर्यात करता है। यह दवाएं सक्रिय फार्मास्युटिकल सामग्री (API), तैयार दवाएं, क्लिनिकल रिसर्च, और फार्माकोविजिलेंस जैसी सेवाएं प्रदान करती हैं। भारत की फार्मा इंडस्ट्री ने वैश्विक स्तर पर एक मजबूत नेटवर्क तैयार किया है, जिससे न केवल इसकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है, बल्कि यह दुनिया के स्वास्थ्य क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
भारत का दवाओं के निर्यात में योगदान
भारत दुनिया के जेनरिक दवाओं के सबसे बड़े निर्माता के रूप में उभर कर सामने आया है। अफ्रीका जैसे क्षेत्रों में, जहां दवाओं की मांग बहुत अधिक है, भारत 50% जेनरिक दवाओं की आपूर्ति करता है। अमेरिका की 40% और ब्रिटेन की 25% दवा जरूरतें भी भारत द्वारा पूरी की जाती हैं। इसका मतलब है कि कई देश भारत पर अपनी स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के लिए निर्भर हैं।
भारत का फार्मास्युटिकल उद्योग: भविष्य की दिशा
भारत का फार्मास्युटिकल उद्योग 2024 तक लगभग 55 बिलियन डॉलर का निर्यात करेगा। भविष्य में यह आंकड़ा और बढ़ सकता है, 2030 तक यह 130 बिलियन डॉलर और 2047 तक 450 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की संभावना है। भारतीय कंपनियां अब अमेरिकी और यूरोपीय बाजारों में भी अपनी पैठ बना चुकी हैं, जहां की दवा नीतियां काफी सख्त मानी जाती हैं।
कैंसर के इलाज में भारत की नई खोज
भारत का फार्मास्युटिकल उद्योग सिर्फ दवाओं के निर्यात में ही नहीं, बल्कि नई चिकित्सा तकनीकों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस समय भारतीय वैज्ञानिक कैंसर के इलाज के लिए कार्टिसेल थैरेपी पर काम कर रहे हैं, जो मैक्रोलाइड एंटीबायोटिक नैफिथ्रोमाइसिन तकनीक पर आधारित है। यह थैरेपी कैंसर के उपचार में मददगार साबित हो सकती है।
