अस्थमा सांस लेने से जुड़ी एक समस्या है, इसमें मरीज की सांस की नली सिकुड़ जाती हैं। ऐसी स्थिति में कई बार नाक से ठीक तरह से सांस भी नहीं आती। ऐसे में सांस लेने और छोड़ने में भी कठिनाई महसूस हो सकती है। आजकल प्रदूषण के चलते अस्थमा के मरीजों को कई तरह की कठिनाईयों से भी जूझना पड़ रहा है। अस्थमा आमतौर पर एलर्जी, प्रदूषण, फंगल सांस से जुड़ी इंफेक्शन और कई बार अनुवांशिक कारणों से भी होता है। आजकल बच्चों में यह बीमारी तेजी से बढ़ रही है। इसके चलते बच्चों को भी इनहेलर की जरूरत पड़ती है लेकिन क्या आप जानते हैं अस्थमा वाले बच्चों को पंप का इस्तेमाल कैसे करना चाहिए? आइए आज इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
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अस्थमा वाले बच्चों को ऐसे इस्तेमाल करना चाहिए पंप
एक्सपर्ट्स के अनुसार, यदि आपके बच्चे को अस्थमा है तो उसे पंप इस्तेमाल करने का सही तरीका जरुर बताएं। पंप का इस्तेमाल करने के दौरान बच्चों को बताएं कि पहले सांस छोड़नी है इसके बाद पंप को मुंह में रखना है। फिर उन्हें पंप को दबाना है और सांस को खींचना है। इसके बाद मुंह को बंद रखकर सांस को अंदर की ओर खींचना है। संभव हो तो 10 सेकेंड के लिए पंप के अंदर की दवा को मुंह में होल्ड करके रखें इसके बाद सांस को छोड़ दें। इस पंप का इस्तेमाल करने के बाद गर्म पानी से कुल्ला करें।
क्या अस्थमा वाले बच्चों को हमेशा पंप लेना पड़ेगा?
डॉक्टर्स के अनुसार, बुजुर्गों या बड़ी उम्र के लोगों को यदि अस्थमा हो तो उनके हमेशा पंप लेने की संभावना ज्यादा होती है लेकिन बच्चों में यह समस्या ठीक हो सकती है इसलिए उन्हें हमेशा पंप लेने की आवश्यकता जरुर पड़ती। बर्शते इसके लिए बच्चों को एलर्जी और प्रदूषण से बचाकर रखना चाहिए। पंप में मिलने वाली दवाईयां आमतौर पर माइक्रोडोज में रहती हैं, जो सेहत के लिए ज्यादा नुकसानदायक नहीं होती।

