समय के साथ-साथ बहुत सी चीजें बदलती रहती हैं। चाहे फिर लाइफस्टाइल हो या रिश्ते। भाषा में भी बहुत से बदलाव आते रहते हैं। हर साल कोई न कोई नया शब्द बाहर निकल आता है। जब उसे सुनते हैं तो लगता है कि पता नहीं क्या ही मतलब होगा, लेकिन जब उस शब्द का अर्थ जाना जाता है तो लगता है कि ये तो आम सी ही बात है, इसके लिए दूसरे शब्द की क्या जरूरत थी।

ऐसे ही रिश्तों में भी आजकल अलग अलग तरह की टर्म्स का इस्तेमाल किया जाता है। कुछ रिश्तों को तो अलग से नाम भी दिए गए हैं। जैसे कि मान लें कि आपको कोई पसंद है पर आप उसके साथ रिलेशन में नहीं जाते या सीरियस नहीं होते तो वो आपकी फ्लिंग (Fling) कहलाएगी। और भी बहुत सी टर्म्स हैं जैसे कि सिचुएशनशिप, फबिंग, बेंचिंग, सॉफ्ट लॉन्च, हार्ड लॉन्च, डेलिकेट डंपिंग आदि और ऐसे एक और चीज सामने आई है जिसका नाम है (Pocketing) ‘पॉकेटिंग’।

रिश्ते में पॉकेटिंग क्या होता है?

पॉकेटिंग रिलेशनशिप में लोग अपने पार्टनर को दुनिया से छिपाते हैं। दो लोग रिश्ते में तो होते हैं लेकिन अपने दोस्तों, परिवार वालों और सोशल मीडिया किसी को नहीं बताते। रिलेशन में मौजूद लड़का या लड़की दोनों में से कोई भी ये कर सकता है। पॉकेटिंग रिलेशनशिप में अकेले में तो आपका प्रेमी या प्रेमिका होगा/होगी, लेकिन लोगों के सामने ऐसा बर्ताव किया जाएगा कि आपको जानते तक नहीं है।

क्या पॉकेटिंग रिलेशनशिप रखना ठीक बात है?

ये फैसला बहुत सी बातों पर निर्भर करता है, जैसे कि अपने रिश्ते को परिवार से छिपाकर रखना, क्योंकि उन्हें लगता है कि परिवार उनकी पसंद और फैसले से नाखुश होगा। लोगों की जजमेंट के डर से या रिश्ते को लेकर पूरी तरह से कंफर्म न होने के चलते भी ऐसा किया जाता है। शुरुआत में ये सब ठीक लगता है क्योंकि नया-नया रिश्ता होता है, लेकिन सालों बीत जाने के बाद भी पार्टनर इस तरह का बर्ताव करता या करती है, तो गलत है। इससे रिश्ता खराब हो जाता है।

पॉकेटिंग के साइड इफेक्ट्स

पॉकेटिंग रिश्ता रहता है तो शक या इनसिक्योरिटी बढ़ सकती है। अगर आपको भी लगता है कि आपका पार्टनर आपके साथ पॉकेटिंग बिहेवियर कर रहा है तो उनसे बात करें। इससे आपको पूरी स्पष्टता मिलेगी और आप आगे सोच सकते हैं कि रिश्ता बढ़ाना है या खत्म करना है।

By tnm

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *