प्रेग्नेंसी के दौरान मछली खाना बेहद फायदेमंद होता है। डॉक्टर्स भी इसे खाने की सलाह देते हैं लेकिन खाने के साथ एक खास तरह की सलाह दी जाती है कि आप ऐसी मछली चुनें जिसमें पारा कम हो और कुछ खास तरह की मछलियों से बचें। अमेरिकियों के लिए FDA, EPA और डाइट संबंधी दिशा-निर्देशों में गर्भवती लोगों को प्रति सप्ताह 8-12 औंस (224-340 ग्राम) मछली खाने की सलाह दी गई है जो लगभग 2-3 सर्विंग है।
प्रेग्नेंसी में खाएं ये मछली
कुछ मछलियां जिनमें पारा कम होता है जैसे एंकोवी, ब्लैक सी बास, कैटफिश, कॉड, मीठे पानी की ट्राउट, हेरिंग, लाइट कैन्ड टूना, सीप, पोलक, सैल्मन, सार्डिन, शाद, झींगा, सोल, तिलापिया और व्हाइटफिश शामिल हैं।

इस तरह की मछली न खाएं
तैयार-से-खाने वाली ठंडी-स्मोक्ड या ठीक की गई मछली से बचें जो लिस्टेरिया बैक्टीरिया से दूषित हो सकती है। आप टूना का सेवन भी सीमित करें क्योंकि इसमें अन्य मछलियों की तुलना में ज्यादा पारा होता है। कच्ची शेलफिश से बचें क्योंकि उनमें हानिकारक बैक्टीरिया, वायरस या विषाक्त पदार्थ हो सकते हैं।
गर्भावस्था के दौरान मछली खाएं या फिर नहीं
इस दौरान मछली खाने से आपके बच्चे के संज्ञानात्मक विकास में मदद मिलेगी। यह हड्डियों के स्वास्थ्य को भी बढ़ावा देगी, अधिक वजन या मोटापे के जोखिम को कम कर देगा और कोलन और मलाशय के कैंसर के जोखिम को भी कम करेगा।
मछली है बेहद हेल्दी
मछली बेहद हेल्दी मानी जाती है। यह गर्भावस्था, स्तनपान या बचपन के दौरान बच्चे के मस्तिष्क के विकास में सहायता करने के लिए जरुरी पोषक तत्व देती है। ओमेगा-3 जिसको डीएच और ईपीए कहते हैं और ओमेगा-6 फैट्स, आयरन, आयोडीन मौजूद होता है। अमेरिकियों के लिए आहार संबंधी दिशा-निर्देश और FDA की मानें तो गर्भवती महिलाओं और बच्चों को केवल मछली, मांस, मुर्गी या अंडे वाले खाद्य पदार्थ नहीं खाने चाहिए जिन्हें सुरक्षित आंतरिक तापमान पर पकाया जा रहा हो ताकि उन खाद्य पदार्थों में मौजूद सूक्ष्मजीवों से बचा जा सके।

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले डॉक्टर या एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
