प्रेग्नेंसी में महिलाओं को कई तरह की सावधानियां बरतने के लिए कहा जाता है दरअसल, इस समय महिला के गर्भ में पल रहे बच्चे को कई तरह का जोखिम होता है। ऐसे में उनको लाइफस्टाइल और डाइट में बदलाव करने की सलाह भी दी जाती है। डॉक्टर्स की मानें तो इस समय महिलाओं के लाइफस्टाइल का असर काफी हद तक बच्चे पर पड़ता है। साथ ही, प्रदूषण भी बच्चे और महिला के लिए नुकसानदायक होता है इससे महिलाओं के लंग्स प्रभावित होते हैं, जो उनके शरीर में ऑक्सीजन लेवल को कम करने का काम करते हैं। ऐसे में महिला के अंगों तक पूरा ऑक्सीजन वाला रक्त न पहुंचने से उनको थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है,जो बच्चे के स्वास्थ्य को भी प्रभावित करेगी। इस आर्टिकल के जरिए जानते हैं कि बढ़ते प्रदूषण प्रेग्नेंट महिलाओं को कैसे प्रभावित कर सकता है?
प्रदूषण के कारण प्रेग्नेंट महिलाओं को हाई बीपी का जोखिम
लंबे समय तक प्रदूषित वायु में रहने के कारण प्रेग्नेंट महिलाओं को कई तरह की समस्याएं होती हैं। प्रदूषित वायु में कार्बन मोनोऑक्साइड और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड मौजूद होती है, यह प्रेग्नेंट महिलाओं के ब्लड प्रेशर में बदलाव करेगी। इससे कुछ महिलाओं को हाई ब्लड प्रेशर का जोखिम बढ़ेगी वहीं, हाई ब्लड प्रेशर प्रेग्नेंट महिलाओं में प्रीकलेम्पसिया होने की संभावना बढ़ा देगा। यह समस्याएं महिलाओं की किडनी और लिवर को प्रभावित करेगी।

बच्चे पर पड़ने वाले प्रभाव
प्रेग्नेंसी में महिलाओं को शरीर में होने वाले बदलाव ब्लड सर्कुलेशन को प्रभावित कर सकते हैं। इससे बच्चे के मिलने वाले पोषक तत्व और ऑक्सीजन में बाधा उत्पन्न हो सकती है। प्रेग्नेंट महिला के द्वारा हानिकारक तत्व गर्भ में पल रहे बच्चे तक पहुंच सकते हैं। इससे बच्चे की ग्रोथ (Baby Growth) प्रभावित हो सकती है। साथ ही, बच्चे को कम वजन, समय से पहले जन्म होना या शिशु में शारीरिक और मानसिक समस्याएं हो सकती हैं।
समय से पहले डिलीवरी का जोखिम बढ़ेगा
प्रदूषण की वजह से कुछ महिलाओं को सूजन और इंफ्लेमेशन जैसी समस्याएं होगी जो यूट्रेस में कॉन्ट्रेक्शन की वजह बनेगी ऐसे में महिलाओं को समय पहले ही डिलीवरी होने का जोखिम बढ़ जाएगा। यदि महिलाएं निर्धारित समय से पहले बच्चे को जन्म देगी तो इससे शिशु को श्वास संबंधी समस्याएं और इम्यून सिस्टम की कमजोरी ज्यादा होगी।
हृदय रोग का जोखिम बढ़ेगा
प्रदूषण से प्रेग्नेंट महिलाओं के रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट और हार्ट पर बुरा असर पड़ेगा। वायु में मौजूद प्रदूषित कण रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट में इकट्ठा होकर रेस्पिरेटरी से जुड़ी समस्याएं जैसे अस्थमा और ब्रोंकाइटिस आदि का कारण बनेगी इसके अलावा प्रेग्नेंसी में ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होने से हृदय प्रणाली पर भी बुरा असर पड़ेगा।

शिशु में जन्म से होने वाली परेशानियों का खतरा
वायु प्रदूषण से गर्भ में पल रहे शिशु को कॉग्नेटिव और न्यूरोलॉजिकल समस्याओं को खतरा होता है। प्रदूषण में पाए जाने वाले तत्व जैसे सीसा, पारा आदि से शिशु को जन्म से होने वाली विकृतियों का जोखिम बढ़ जाएगा।
ऐसे करें बचाव
इससे बचने के लिए प्रेग्नेंट महिलाएं घर में प्यूरीफायर लगा सकती हैं। इसके अलावा, प्रेग्नेंसी में महिलाओं को प्रदूषण होने पर बाहर जाते समय मास्क का इस्तेमाल करें। साथ ही, डॉक्टर की सलाह पर डाइट और लाइफस्टाइल में जरुरी बदलाव करें। वहीं, इसके प्रभावों को कम करने के लिए डॉक्टर से नियमित रूप से जांच करवाएं।
