दीवाली का आगमन हो गया तो समझ लें कि मौसम में भी बदलाव होने वाला है। दीवाली तक ठंड शुरू हो जाती है। सुबह-शाम का तापमान अलग हो जाता है। जिस वजह से शरीर पर भी इसका प्रभाव पड़ता है और व्यवहार पर भी। जानकारी के अनुसार 12 से 21 डिग्री सेल्सियस में मूड काफी अच्छा होता है और गुस्सा कम आता है। जबकि तापमान ज्यादा होने पर इससे उलट हो सकता है।
शरीर पर मौसम का प्रभाव
इसका असर जब शरीर पर पड़ता है तो एलर्जी की समस्या हो सकती है। मौसम का असर जोड़ों पर भी पड़ता है। सर्दियों में जॉइंट पेन बढ़ सकता है। पाचन संबंधी समस्या होने का डर भी हो सकता है। मौसम के बदलने से खानपान भी बदलता है जिसका असर पेट पर पड़ता है। चलिए अब जानते हैं इसका क्या असर पड़ता है दिमाग पर।
मौसम के बदलाव का दिमाग पर असर
मौसम में बदलाव होने पर तनाव और चिंता बढ़ जाती है। कुछ लोगों में सर्दियों में डिप्रेशन के लक्षण देखने को मिल सकते हैं, क्योंकि एक्सपर्ट्स का मानना है कि ठंड में सूर्य की रोशनी कम मिलती है। इसे विंटर डिप्रेशन या सीजनल इफेक्टिव डिसॉर्डर कहा जाता है।
आपको बता दें कि हमारा शरीर दिन में एक बार कॉर्टिसॉल रिलीज करता है और रिलीज का समय बार बार बदलता रहे तो डिप्रेशन की समस्या हो सकती है औैर मौसम बदलने पर ऐसा होना आम बात है। मौसम में बदलावों से गुस्सा और चिड़चिड़ापन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में मौसम में बदलाव का असर ज्यादा देखने को मिलता है।
बचने के उपाय
मौसम के प्रभाव से बचना चाहते हैं तो रोजाना एक्सरसाइज करें, सही रुटीन फॉलो करें, हेल्दी फूड्स खाएं, पूरी नींद लें, तनाव हो तो योग-मेडिटेशन करें और मौसम का कहना मान कर ही कपड़े पहनें।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले डॉक्टर या एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
