अकेले रहना काफी लोगों को पसंद होता है, लेकिन कई लोग ऐसे भी होते हैं जिन्हें पूरे तरीके से अकेले रहना होता है। वे किसी को अपने आसपास नहीं देखना चाहते, किसी से बात नहीं करना चाहते। उनके लिए सिर्फ वे ही काफी हैं। लेकिन ऐसा करना मानसिक स्वास्थ्य के लिए गलत साबित हो सकता है। एक नई स्टडी में पता चला है कि अकेले रहने वाले लोगों में डिमेंशिया होने का खतरा 30% तक बढ़ जाता है।
छ: लाख से अधिक लोगों पर किए गए अध्य्यन में पता चला कि अकेलेपन के कारण डिमेंशिया का खतरा 30 प्रतिशत तक बढ़ जाता है और ये जोखिम उम्र या लिंग पर निर्भर नहीं करता, बल्कि अकेलापन किसी भी उम्र में डिमेंशिया के खतरे को बढ़ा सकता है।
अकेलेपन का प्रभाव
अकेलापन की वजह से बहुत सी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं। अध्ययन में पता चला कि अकेलापन न केवल डिमेंशिया का खतरा बढ़ाता है, बल्कि इसके लक्षण, जैसे कि सोचने-समझने की क्षमता में कमी या याददाश्त में गिरावट आदि बीमारी के शुरुआते से पहले ही दिखाई देने लगते हैं।
एक्सपर्ट्स के अनुसार डिमेंशिया एक लंबी प्रक्रिया है, जिसके लक्षण बीमारी के शुरू होने से काफी समय पहले ही दिखने लगते हैं। इसे समझने के लिए जरूरी है कि हम अकेलेपन और डिमेंशिया के बीच के संबंधों पर गहराई से अध्ययन करें।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले डॉक्टर या एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
