ठंड और गर्मी लगना ये एक आम प्रोसेस है, लेकिन बहुत ज्यादा ठंड पड़ने पर खून गाढ़ा होने लगता है, जिसके कारण खून के थक्के जमने लगते हैं। इस वजह से आपको बहुत सी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
ठंड के कारण होने वाली समस्याएं
आपको बता दें कि फ्रॉस्टबाइट, एक गंभीर स्थिति है जो अत्यधिक ठंड के संपर्क में आने से होती है। इसके अलावा जब शरीर ज्यादा ठंड के संपर्क में आता है तो ये हाइपोथर्मिया का शिकार हो सकता है। इस वजह से भ्रम, भटकाव, कंपकंपी और समन्वय का खतरा रहता है, त्वचा नीली हो जाती है, सांस और नाड़ी धीमी हो जाती है, और व्यक्ति बेहोश हो सकता है या कोमा में जा सकता है।
ट्रेंच फ़ुट और चिलब्लेन के बारे में आपने सुना होगा ये एक गैर-ठंड परिधीय ठंड की चोट होती है जो तीव्र ठंड के संपर्क में आने से होती है। जब ज्यादा ठंड हो जाती है तो खून गाढ़ा होने लगता है, जिस कारण थक्के जमने का खतरा हो सकता है और स्ट्रोक भी। शरीर जब अत्यधिक ठंड के संपर्क में आता है तो इस वजह से संक्रमण से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है। त्वचा का रंग भी खराब हो सकता है।
सर्दियों में ज्यादा दिल और फेफड़े की समस्या
हमारा शरीर लगातार कोशिश करता रहता है कि मौसम चाहे जैसी भी हो शरीर की आंतरिक स्थितियां एक जैसी बनी रहे। ये इसलिए किया जाता है ताकि हमारे सेल्स और ऑर्गन फेल होने से बचे रहे। सर्दियों में ही ज्यादा दिल के दौरे और फेफड़ों की समस्याएं होती हैं।
इस समय में बर्फ भी काफी आ जाती है तो संतुलन की समस्याएं होती हैं। बर्फीले फुटपाथों की वजह से गिरने और हड्डियों के टूटनी दिक्त बन जाती है। ऐसे में टेक्सचर्ड सोल वाले जूते पहनें, हैंडरेल का उपयोग करें, जिससे आप फिसलन वाली सतहों से बच सकते हैं।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले डॉक्टर या एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
