मां बनने की जर्नी हर एक महिला के लिए बहुत खास होती है और नवजात के जन्म के बाद मां पर बहुत सी जिम्मेदारियां आ जाती हैं। शिशु को समय-समय पर दूध पिलाना भी मां बनने का एक अहम हिस्सा है जो नवजात के विकास के लिए बहुत जरूरी है। जन्म के बाद,शिशु का पहला भोजन मां का दूध होता है जो न सिर्फ पोषण देता है, बल्कि उसे कई प्रकार के रोगों से भी बचाता है। मां का दूध शिशु की जरूरतों के अनुसार तैयार होता है जिसमें सभी पोषक तत्व, विटामिन और एंटीबॉडी शामिल होते हैं। शिशु को दूध पिलाने से मां और शिशु के बीच एक गहरा बंधन भी बनता है। माता-पिता अक्सर यह सोचते हैं कि क्या उन्हें अपने शिशु को दूध पिलाने के लिए जगाना चाहिए या उसे अपनी नींद जारी रखने देना चाहिए। ऐसे में आज आपको इस आर्टिकल के जरिए बताते हैं कि शिशु को दूध पिलाने के लिए जगाना सही रहेगा या फिर नहीं।

गीला डायपर

रोजाना शिशु कितने डायपर गीले कर रहा है इससे भी आप जान सकते हैं कि शिशु को पर्याप्त पोषण मिल रहा है या नहीं। यदि शिशु के पास दिन में 6-8 गीले डायपर होते हैं तो यह संकेत है कि वह पर्याप्त मात्रा में दूध पी रहा है। इससे पता चलता है कि उसकी प्रक्रिया सही ढंग से हो रही है। ऐसे में यदि शिशु गहरी नींद में है और उसके डायपर गीले हैं तो उसे जगाकर दूध पिलाने की जरुरत नहीं होती।

शिशु का वजन और स्वास्थ्य

यदि आपके शिशु का वजन बढ़ रहा है और वह नियमित रूप से दूध पी रहा है तो उसे जगाकर दूध पिलाने की जरूरत नहीं है। स्वस्थ शिशु अपने आप भूख के संकेत देते हैं। यदि शिशु हर 2-3 घंटे में जागकर दूध पी रहा है और उसका वजन सही से बढ़ रहा है तो उसे सोते समय न जगाना सही रहेगा। इससे शिशु को पूरी नींद मिलेगी जो उसके विकास के लिए जरुरी है।

जागने के समय एक्टिव

जब शिशु जागता है तो उसे एक्टिव होना चाहिए। यदि शिशु जागने पर खिलौनों से खेलता है या फिर मुस्कुराता है तो यह दर्शाता है कि उसका मानसिक और शारीरिक विकास सही दिशा में हो रहा है। ऐसे में जब शिशु जागकर खेल रहा हो और उसका विकास सामान्य हो तो उसे दूध पिलाने के लिए जगाने की जरूरत नहीं होती।

शिशु को कब जगाएं

हालांकि, कुछ परिस्थितियां ऐसी भी होती हैं जब शिशु को जागकर दूध पिलाना जरूरी है। अगर शिशु का वजन कम है या उसे विशेष देखभाल की जरूरत है तो उसे हर 2-3 घंटे में दूध पिलाना उचित है इसके अलावा, यदि शिशु का विकास धीमा हो रहा है या वह दूध पीने में असमर्थ है तो उसे जगाना और दूध पिलाना जरूरी है।

शिशु की जरुरतों पर दें ध्यान

हर शिशु की जरूरतें अलग होती हैं और उनके विकास के लिए सबसे सही निर्णय लेने के लिए माता-पिता को डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। डॉक्टर की सलाह से आपको यह पता चलेगा कि कब शिशु को दूध पिलाने के लिए जगाना चाहिए और कब उसे सोने देना चाहिए।

भूखे शिशु को जगाकर पिलाएं दूध

रात के समय विशेषकर पहले कुछ हफ्तों में शिशु को हर 2-3 घंटे में दूध पिलाने की सलाह दी जाती है। नवजात शिशु की नींद कभी-कभी गहरी होती है लेकिन अगर वह भूखा हो तो उसे जागकर दूध पिलाना जरूरी है। जैसे-जैसे शिशु बड़ा होता है और वजन बढ़ता है रात में उसे दूध पिलाने की जरूरत कम होती जाती है।

निष्कर्ष

शिशु को दूध पिलाने के लिए कब जगाना चाहिए और कब नहीं यह समझना बहुत जरूरी है। यदि शिशु का वजन बढ़ रहा है गीले डायपर की संख्या ज्यादा है और वह जागने पर एक्टिव है तो उसे जगाने की जरुरत नहीं होती लेकिन यदि शिशु का विकास धीमा है, तो उसे दूध पिलाने के लिए जागना उचित है।

By tnm

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