आयुर्वेद का भारतीय चिकित्सा इतिहास में बहुत महत्वपूर्ण स्थान रह चुका है। इसमें बताई गई औषधियां शरीर को कई तरह से लाभ पहुंचा सकती हैं इतना ही नहीं कई प्रकार की गंभीर बीमारियों के जोखिम को कम करने में भी उपचार के तौर पर इन औषधियों को वर्षों से इस्तेमाल किया जा रहा है। हम सभी के घरों में कई ऐसे मसाले रोजाना इस्तेमाल होते हैं जो हमारी सेहत के अनुसार भी बेहद लाभकारी माने जाते हैं। डायबिटीज से लेकर दिल संबंधी रोग और त्वचा से संबंधित कई प्रकार की समस्याओं के लिए कुछ औषधियां खास तौर पर सहायता कर सकती हैं।

आयुर्वेद के इतिहास पर अगर हम नजर डालें तो इसमें जड़ी-बूटियों और मसालों के प्रयोग से होने वाले स्वास्थ्य लाभ का विशेष जिक्र मिलता है। मेडिकल साइंस ने भी इससे होने वाले फायदों को स्वीकार किया है। अध्ययनों में पाया गया है कि आयुर्वेदिक सिद्धांत पर आधारित औषधियां कई गंभीर बीमारियों का खतरा कम हो सकता है। इतना ही नहीं कुछ को कैंसर जैसी गंभीर और खतरनाक बीमारियों से बचाने वाला भी माना जाता है। आइए जानते हैं कि किन औषधियों का सेवन करना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है।
हल्दी
इसमें प्राचीन समय से घरेलू उपचार के तौर पर प्रयोग में इस्तेमाल किया जा रहा है। इसमें औषधीय गुणों वाले कई यौगिक होते हैं जिनमें से सबसे महत्वपूर्ण करक्यूमिन है। यह एक शक्तिशाली एंटीऑक्सिडेंट है, जो ऑक्सीडेटिव डैमेज से लड़ने में मदद करने के साथ कई तरह की बीमारियों के खतरे को कम करने में मदद कर सकता है। हल्दी को सूजन और दर्द की समस्या में विशेष फायदेमंद माना जाता है।
मेथी
मेथी के गुणों का आयुर्वेद में खास जिक्र मिलता है। टेस्टोस्टेरोन हार्मोन के स्तर पर इसके प्रभाव देखने को मिलते हैं इसके अलावा ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में भी मेथी का सेवन करना फायदेमंद हो सकता है। अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि इसमें प्लांट प्रोटीन 4-हाइड्रॉक्सीसोल्यूसीन होता है जो इंसुलिन के कार्य में सुधार कर सकता है। मानव अध्ययनों से पता चला है कि प्रतिदिन मेथी के अर्क का सेवन करने से ब्लड शुगर का स्तर कम करने में मदद मिलती है।

दालचीनी
इसका हर घर में इस्तेमाल होता है। व्यंजनों का स्वाद बढ़ाने के साथ कई तरह की बीमारियों के जोखिम को कम करने तक में इसका इस्तेमाल होता है। दालचीनी में सिनामाल्डिहाइड नाम का यौगिक होता है जिसे अध्ययनों में कई तरह का फायदेमंद माना जाता है। इसमें शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं जो सूजन को कम करने से लेकर ब्लड में कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर को नियंत्रित करने में मददगार माने जाते हैं।
अदरक
कई अध्यनों में अदरक के एंटी-इंफ्लामेटरी और दर्द निवारक प्रभावों के लिए इसको विशेष कारगर माना जाता रहा है। अध्ययनों से यह पता चलता है कि अदरक का सेवन मतली को सफलतापूर्वक ठीक करने में मदद कर सकता है। मॉर्निंग सिकनेस, सर्दी-जुकाम, और गले की समस्याओं में भी इसके सेवन को फायदेमंद पाया गया है। अदरक के एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण दर्द और सूजन को ठीक करने में मदद करते हैं।

