तंदरुस्ताए नमः-थकान भरे दिन के बाद जब आप चैन की नींद लेना चाहें और उसी वक्त अचानक सांस फूलने लगे – यह एक डरावना अनुभव हो सकता है। ऑर्थोप्निया से जूझ रहे मरीज़ों के लिए यह डरावनी स्थिति हर रात की हकीकत बन जाती है। लेकिन अब जालंधर के एन.एच.एस अस्पताल में आधुनिक कार्डियक केयर और अनुभवी डॉक्टरों की टीम के चलते ऐसे मरीज़ों को राहत मिल रही है।
क्या है ऑर्थोप्निया?
ऑर्थोप्निया का मतलब है लेटते समय सांस लेने में तकलीफ होना। यह कोई साधारण समस्या नहीं, बल्कि हृदय रोगों का संकेत हो सकती है, खासकर जब दिल का बायां हिस्सा ठीक से काम नहीं करता। इसका परिणाम होता है फेफड़ों में पानी भर जाना, जिससे लेटते समय सांस फूलने लगती है।
एन.एच.एस अस्पताल के DM कार्डियोलॉजी डॉ. साहिल सरीन ने बताया कि ऑर्थोप्निया कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक चेतावनी है कि दिल मदद मांग रहा है। अगर समय पर जांच हो जाए, तो यह जानलेवा नहीं बनती।
एन.एच.एस अस्पताल: दिल के मरीज़ों की उम्मीद

एन.एच.एस अस्पताल में कार्डियक केयर के क्षेत्र में जबरदस्त तकनीकी और चिकित्सकीय प्रगति हुई है। डॉ. सरीन, जिनके पास 10 वर्षों से अधिक का अनुभव है, हार्ट फेल्योर और जटिल हृदय समस्याओं के इलाज में विशेषज्ञता रखते हैं।
उन्होंने बताया कि यहां पर उन्नत “30 कैथ लैब” तकनीक का इस्तेमाल होता है, जिससे दिल और उसकी नसों को तीन-तरफा (3D) एंगल से देखा जा सकता है। इससे न सिर्फ सटीक डायग्नोसिस होता है, बल्कि मरीज को तुरंत इलाज मिल पाता है।
सच्ची कहानी: दो महीने की तकलीफ का समाधान
फगवाड़ा के 62 वर्षीय एक मरीज़ को दो महीने से नींद में सांस फूलने की समस्या हो रही थी। लोकल क्लीनिकों से इलाज करवाने के बाद भी उन्हें आराम नहीं मिला। जब वे एन.एच.एस अस्पताल पहुंचे, तो 3डी कैथ लैब और इको टेस्ट के जरिए उनके दिल की नसों में गंभीर ब्लॉकेज और पंपिंग की कमजोरी का पता चला।
डॉ. सरीन की टीम ने बिना चीरे वाली एंजियोप्लास्टी की और दवाओं की मदद से खुलने वाले स्टेंट लगाए। कुछ ही समय में मरीज़ की हालत में सुधार हुआ और वे पहली बार चैन की नींद ले सके।
इलाज के साथ-साथ जागरूकता भी
एन.एच.एस अस्पताल न सिर्फ इलाज देता है, बल्कि लोगों को शिक्षित भी करता है। फ्री हार्ट चेकअप कैंप, सेमिनार और जनजागरूकता कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं। साथ ही डॉ. सरीन कहते हैं कि अगर किसी को रात में सांस की तकलीफ हो, या सोते समय कई तकियों की जरूरत महसूस हो, तो उसे कार्डियोलॉजिस्ट से सलाह जरूर लेनी चाहिए।
उन्नत तकनीक और मानवता का मेल
अस्पताल की कार्डियक ICU में रीयल-टाइम मॉनिटरिंग, वेंटिलेटर सपोर्ट और अनुभवी स्टाफ हर वक्त तैयार रहते हैं। यहां सिर्फ मशीनें नहीं, बल्कि अनुभवी डॉक्टर, नर्सें और टेक्नीशियन भी मिलकर मरीज को संपूर्ण देखभाल देते हैं।
