आज के बदलती हुई लाइफस्टाइल में हर कोई किसी न किसी बीमारी से जूझ रहा है। भागदौड़ भरी जिंदगी में काम के बोझ के तले ज्यादातर लोग मानसिक तौर पर बीमार रहने लगे हैं। इसके कारण डिमेंशिया या अल्जाइमर जैसी मानसिक समस्याएं भी होना आम हो गई है। ऐसे ही एक समस्या Schizophrenia भी है। यह एक ऐसी स्थिति होती है जो फिजिकली और मेंटली तौर पर प्रभावित करता है। यह बीमारी आमतौर पर टीएनज में देखी जाती है। इस बीमारी की चपेट में कोई भी आ सकता है। इसमें इंसान के सोचने, समझने की क्षमता कम हो जाती है और उसके व्यवहार में भी बदलाव दिखने लगता है। हर साल इस बीमारी के प्रति लोगों को जागरुक करने के लिए 24 मई को World Schizophrenia Day मनाया जाता है। ऐसे में आज आपको बताते हैं कि इसके लक्षण क्या है।
आखिर क्या होती है ये बीमारी?
सिजोफ्रेनिया एक मानसिक बीमारी होती है। ये 16 से 45 साल तक की उम्र के लोगों को अपनी चपेट में लेती है। कई बार तो इससे पीड़ित इंसान इतना परेशान हो जाता है कि वो गलत कदम भी उठा लेता है। क्लीवलैंड क्लीनिक के अनुसार, इस बीमारी में आपका दिमाग काम करना बंद कर देता है। आपके सोचने का नजरिया तक बदल जाता है। आपकी याददाश्त कमजोर हो जाती है। आपको हर एक चीज के लिए संघर्ष करना पड़ता है। वहीं यदि सही समय पर इसका इलाज न किया गया तो इंसान पागल तक हो जाता है। कई मामलों में तो व्यक्ति की मौत भी हो सकती है। सिजोफ्रेनिया से दुनिया भर में हर 100,000 लोगों में से 221 लोग जूझ रहे हैं।
लक्षण
. उदास रहना
. सुख दुख महसूस न कर पाना
. किसी से बातें न करना
. भूख प्यास खत्म होना
. व्यवहार में बदलाव होना
. डिप्रेशन
. हमेशा डर लगना
. कई तरह के भ्रम पालना
. डरावाने साए को महसूस करना
. सुसाइड के बारे में सोचना

इसलिए होती है ये बीमारी
क्लीवलैंड क्लीनिक के अनुसार, इस बीमारी को कोई खास कारण नहीं है। ये ज्यादातर उन लोगों को होती है जिनका जन्म से पहले दिमागी विकास नहीं हो पाता। वहीं कई बार नसों के दबने के कारण भी ये बीमारी हो सकती है। अगर आप ड्रग्स या नशे से जुड़ी कोई भी चीज लेते हैं तो इस बीमारी के चांस बढ़ जाते हैं।
इलाज
सिजोफ्रेनिया को पूरी तरह से ठीक नहीं किया जा सकता लेकिन इसके लिए कुछ थेरेपी और दवाईयां हैं जिनकी मदद से इन्हें कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा योग और मेडिटेशन करना भी फायदेमंद होगा।
