बिहार में बर्ड फ्लू का प्रकोप जारी है, लेकिन अभी तक इसकी पुष्टि के लिए जांच की सुविधा नहीं है। अधिकारियों के अनुसार, राज्य में लगातार बर्ड फ्लू के प्रकोप के कारण इस तरह की प्रयोगशाला की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा है। राज्य के पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग के एक अधिकारी ने डाउन टू अर्थ (डीटीई) को बताया कि सरकार पिछले 5-6 साल से बर्ड फ्लू की पुष्टि के लिए बिहार में जांच प्रयोगशाला स्थापित करने की योजना बना रही है। विभाग ने इस तरह की प्रयोगशाला स्थापित करने के लिए वित्तीय वर्ष 2023-24 में 14.92 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं।

इस संबंध में विभिन्न एजेंसियों से भी परामर्श किया गया है। कुछ महीने पहले राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की टीम ने इस संबंध में पटना का दौरा किया था। लेकिन राज्य को अभी भी प्रयोगशाला का इंतजार है। स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने डीटीई को बताया, “बिहार में हर साल बर्ड फ्लू के मामले सामने आते हैं। सरकारी एजेंसियों को बर्ड फ्लू की पुष्टि के लिए संदिग्ध जगहों से नमूने पश्चिम बंगाल के कोलकाता या मध्य प्रदेश के भोपाल भेजने पड़ते हैं।” बिहार से अधिकांश नमूने बर्ड फ्लू की पुष्टि के लिए भोपाल स्थित राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान (NIHSAD) और कोलकाता स्थित क्षेत्रीय रोग निदान प्रयोगशाला (RDDL) को भेजे गए हैं।

बर्ड फ्लू की पुष्टि

“बर्ड फ्लू की पुष्टि में आमतौर पर एक सप्ताह से अधिक समय लगता है। सबसे पहले, नमूने वहां भेजे जाने चाहिए। इसमें ही दो से तीन दिन लगते हैं। उसके बाद, लैब के कर्मचारी परीक्षण करते हैं और अंत में परीक्षण के परिणाम की पुष्टि करते हैं। इस सब में एक सप्ताह लग जाता है। यह समय की बर्बादी है। यदि राज्य में एक परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित की जाती है, तो बर्ड फ्लू की पुष्टि में मुश्किल से 24 घंटे लगेंगे,” अधिकारी ने कहा।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार ने लगभग चार साल पहले ऐसी प्रयोगशाला सुविधा स्थापित करने के लिए केंद्र को एक प्रस्ताव भेजा था। चूंकि बिहार को इसके लिए केंद्र सरकार की मंजूरी नहीं मिली, इसलिए राज्य सरकार ने अपने दम पर एक प्रयोगशाला स्थापित करने का फैसला किया। Source: DownToEarth

By tnm

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