हर साल 24 मार्च को विश्व तपेदिक दिवस (World TB Day) मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य लोगों को इस खतरनाक बीमारी के बारे में जागरूक करना है। टीबी (Tuberculosis) एक संक्रामक बीमारी है जो दुनियाभर में लाखों लोगों को प्रभावित करती है। भारत में भी यह एक गंभीर समस्या बनी हुई थी, लेकिन 2015 के बाद से यह आंकड़े सुधरने लगे हैं। वहीं अब भारत सरकार 2025 तक देश को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य लेकर काम कर रही है।

उत्तर प्रदेश का सिद्धार्थ नगर बन रहा रोल मॉडल

उत्तर प्रदेश का सिद्धार्थ नगर जिला इस समय टीबी मुक्त भारत अभियान का एक प्रमुख उदाहरण बनकर उभरा है। यह जिला नेपाल से सटा हुआ है और इसे एस्पिरेशनल जिला के रूप में चुना गया है। यहां टीबी के मामलों को जल्दी पहचानने, उनका इलाज करने, और लोगों को जागरूक करने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। जिले में विभिन्न रणनीतियों जैसे शीघ्र जांच, शीघ्र उपचार, शीघ्र पोषण और जनभागीदारी के जरिए अभियान को सफल बनाने की दिशा में काम हो रहा है।

टीबी के मरीजों की पहचान के लिए किए गए इनोवेशन

सिद्धार्थ नगर में टीबी की जांच में कई नवीनतम तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन तकनीकों के तहत कुल 12 लाख लोगों की स्क्रीनिंग की गई, जिनमें से 2340 लोग टीबी से प्रभावित पाए गए। इस जिले ने विभिन्न प्रकार के इनोवेशन किए हैं, जो अब बाकी जिलों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं।

AI से मिनटों में टीबी की पहचान

सिद्धार्थ नगर में AI और हैंड-हेल्ड पोर्टेबल एक्स-रे मशीन का उपयोग किया जा रहा है, जिससे टीबी की पहचान मिनटों में की जा सकती है। इस मशीन का एक बड़ा फायदा यह है कि इसे कहीं भी सेटअप किया जा सकता है और यह बिना किसी अस्पताल या डिस्पेंसरी के, दूरदराज के इलाकों में भी आसानी से जांच कर सकती है।

टीबी से बचाव और इलाज

टीबी एक संक्रामक बीमारी है जो मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है। यह खांसने, छींकने और थूकने से फैलती है। इसके सामान्य लक्षणों में तीन हफ्ते से ज्यादा खांसी, बुखार, वजन कम होना और छाती में दर्द शामिल हैं। अगर समय पर पहचान हो जाए तो टीबी का इलाज संभव है।

भारत को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2018 में टीबी मुक्त भारत अभियान की शुरुआत की थी और 2025 तक देश को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा था। भारत ने ग्लोबल टारगेट से 5 साल पहले यह लक्ष्य पूरा करने की प्रतिबद्धता जताई है।

टीबी के खिलाफ इस अभियान में AI और नई तकनीकों का उपयोग इस बीमारी के इलाज और पहचान में तेजी लाने में मददगार साबित हो रहा है। सिद्धार्थ नगर जैसे जिले अब इस दिशा में एक प्रेरणा बन रहे हैं।

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले डॉक्टर या एक्सपर्ट्स की सलाह जरूर लें।

By tnm

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