हमारे जीवनकाल में हर पांच में से एक व्यक्ति को कैंसर की बीमारी हो सकती है, और यह संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। एक अनुमान के अनुसार 2025 तक दुनियाभर में किसी न किसी प्रकार के कैंसर से पीड़ित लोगों की संख्या दो करोड़ तक पहुंच सकती है। लेकिन जैसे-जैसे चिकित्सा विज्ञान ने वैक्सीनेशन के ज़रिए कई बीमारियों को रोकने में सफलता पाई है, वैसे ही यह आशा भी जताई जा रही है कि कैंसर का इलाज भी वैक्सीनेशन से संभव हो सकता है।
कैंसर से लड़ने के लिए नई वैक्सीनेशन तकनीक
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक वर्तमान में कई देशों में कैंसर के इलाज के लिए वैक्सीनेशन के प्रयोग किए जा रहे हैं। फेफड़ों के कैंसर से लड़ने के लिए बनाई गई एक वैक्सीन का सात देशों में परीक्षण किया जा रहा है। वहीं, फ्लोरिडा विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी वैक्सीन विकसित की है, जो ब्रेन कैंसर की रोकथाम में मददगार हो सकती है। इन प्रयासों की शुरुआत कोविड महामारी के दौरान बनाई गई वैक्सीन से हुई थी, खासकर वह वैक्सीन जो mRNA तकनीक पर आधारित है। यह तकनीक पारंपरिक वैक्सीनेशन से अधिक प्रभावशाली मानी जा रही है।
कैंसर क्या है और यह हमारे शरीर पर कैसे असर डालता है?
कैंसर एक ऐसी बीमारी है, जिसमें शरीर की कोशिकाएं अनियंत्रित तरीके से बढ़ने लगती हैं। शरीर में करीब 200 प्रकार की कोशिकाएं होती हैं, जिनसे विभिन्न अंग बनते हैं। ये कोशिकाएं शरीर के संकेतों पर काम करती हैं, जो डीएनए द्वारा नियंत्रित होते हैं। कभी-कभी डीएनए में गड़बड़ी हो जाती है, जिससे कोशिकाएं सामान्य से अलग तरीके से बढ़ने लगती हैं और शरीर में गांठों (ट्यूमर) का निर्माण होता है।
हालांकि सभी ट्यूमर कैंसर नहीं होते। सामान्य ट्यूमर से शरीर को कोई नुकसान नहीं होता, लेकिन कैंसरयुक्त ट्यूमर शरीर के अन्य अंगों को प्रभावित कर सकते हैं।
कैंसर की पहचान और इलाज में इम्यूनोथेरेपी की भूमिका
कैंसर की कोशिकाएं शरीर के इम्यून सिस्टम से बचने के लिए अपनी सतह पर ऐसे प्रोटीन लगा लेती हैं, जिससे शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र उन्हें पहचान कर नष्ट नहीं कर पाता। हालांकि इम्यूनोथेरेपी की मदद से शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र को कैंसर की कोशिकाओं को पहचानने और नष्ट करने में सक्षम किया जा सकता है। इम्यूनोथेरेपी और वैक्सीनेशन दोनों का उद्देश्य शरीर के इम्यून सिस्टम को कैंसर से लड़ने के लिए प्रशिक्षित करना है।
कैंसर के विभिन्न प्रकार और उनकी पहचान
कैंसर के सैंकड़ों प्रकार होते हैं, और हर प्रकार की कैंसर की कोशिकाओं का स्वरूप अलग होता है। यदि इन कोशिकाओं को सही तरीके से पहचाना जा सके तो इलाज संभव हो सकता है। 25 साल पहले मानव जीनोम का पूरा मैप तैयार किया गया था, जिससे कैंसर की कोशिकाओं की पहचान करना संभव हुआ। इस जानकारी के आधार पर कैंसर के विभिन्न प्रकारों के लिए खास दवाइयां विकसित की जा रही हैं।
कैंसर के इलाज के लिए वैक्सीन: एक नई उम्मीद
कैंसर के पनपने में मदद करने वाले कुछ वायरस पहले से ही वैक्सीनेशन के जरिए रोके जा चुके हैं। उदाहरण के तौर पर, एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) और हेपेटाइटिस बी वायरस के खिलाफ वैक्सीनेशन पहले से मौजूद है। इन वायरस से कैंसर के विभिन्न प्रकारों के उत्पन्न होने का खतरा होता है। इसके अलावा नई वैक्सीनेशन तकनीकों का विकास किया जा रहा है, जो कैंसर की कोशिकाओं को शरीर में प्रवेश करने से पहले ही रोक सके।
कैंसर के इलाज के लिए एमआरएनए वैक्सीनेशन
एमआरएनए (mRNA) वैक्सीनेशन की तकनीक पर आधारित कैंसर के खिलाफ वैक्सीनेशन का ट्रायल किया जा रहा है। यह तकनीक अब तक कोविड-19 वैक्सीनेशन में सफलता प्राप्त कर चुकी है और यह अन्य बीमारियों की रोकथाम में भी उपयोगी साबित हो रही है। एमआरएनए तकनीक से बनी वैक्सीनेशन शरीर के इम्यून सिस्टम को सक्रिय करके कैंसर की कोशिकाओं से लड़ने के लिए तैयार करती है।
कैंसर की वैक्सीन के विकास में प्रगति और चुनौतियां
वैक्सीनेशन के माध्यम से कैंसर के इलाज की दिशा में वैज्ञानिकों द्वारा कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि कैंसर के सभी प्रकारों के लिए एक सामान्य वैक्सीन नहीं बनाई जा सकती, क्योंकि हर कैंसर का स्वरूप अलग होता है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि कैंसर के इलाज में वैक्सीनेशन का इस्तेमाल सबसे प्रभावी तब होगा जब कैंसर का पता जल्दी चल जाए और इलाज के अन्य विकल्प जैसे सर्जरी और कीमोथेरेपी के साथ इसका उपयोग किया जाए।
कैंसर के इलाज में वैक्सीनेशन का भविष्य
वैक्सीनेशन के जरिए कैंसर से लड़ने की संभावना अगले पांच से दस सालों में और बढ़ सकती है। पैट्रिक ओट, डाना-फ़ार्बर इंस्टीट्यूट के मेलानोमा डिसीज़ सेंटर के निदेशक, का मानना है कि वैक्सीनेशन से कैंसर के उपचार में एक नया मोड़ आ सकता है। हालांकि, इसके प्रभावी इस्तेमाल के लिए समय की आवश्यकता है। Source – बीबीसी न्यूज़
