एसबीआई रिसर्च द्वारा हाल ही में जारी रिपोर्ट में यह सामने आया है कि पिछले 12 वर्षों में भारतीय परिवारों के खर्च की प्राथमिकताएं काफी बदल गई हैं। खासकर ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में खाद्य पदार्थों, विशेषकर दाल और अनाज की खपत में पांच फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है। रिपोर्ट के अनुसार भारतीय अब भोजन पर खर्च करने के बजाय गैर-खाद्य पदार्थों पर अधिक खर्च कर रहे हैं। यह बदलाव मुख्य रूप से साफ-सफाई और सौंदर्य प्रसाधनों जैसे उत्पादों की ओर अधिक रुचि दिखाने के कारण हुआ है।
पोषण की बजाय सौंदर्य प्रसाधन और साफ-सफाई पर खर्च
रिपोर्ट में यह भी देखा गया है कि भारतीय परिवारों की प्राथमिकताएं पोषण के बजाय अब साफ-सफाई, सौंदर्य प्रसाधनों और शरीर की सुंदरता पर अधिक केंद्रित हो गई हैं। लोग पहले से ज्यादा ब्यूटी और पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स पर खर्च कर रहे हैं, जबकि पोषण संबंधी खाद्य पदार्थों पर खर्च में गिरावट आई है। इसका एक कारण जीवनशैली में आए बदलाव हो सकते हैं, जैसे कामकाजी जीवन, आर्थिक विकास और शहरीकरण के कारण।
शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में खर्च में अंतर
शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में खर्च के पैटर्न में एक दिलचस्प अंतर दिखाई दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य पदार्थों पर खर्च में 5.86 फीसदी की गिरावट आई, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह गिरावट 2.94 फीसदी रही। इसके विपरीत गैर-खाद्य पदार्थों पर खर्च में ग्रामीण क्षेत्रों में 5.86 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह वृद्धि 2.94 फीसदी रही। इसका मतलब है कि ग्रामीण इलाकों में जीवनशैली में बदलाव और आर्थिक विकास के साथ लोग गैर-खाद्य उत्पादों पर ज्यादा खर्च कर रहे हैं।
खाद्य पदार्थों पर खर्च में गिरावट
ग्रामीण क्षेत्र
2011-12 में खाद्य पदार्थों पर खर्च 52.9 फीसदी था, जो 2023-24 में घटकर 47.04 फीसदी रह गया।
शहरी क्षेत्र
2011-12 में यह खर्च 42.62 फीसदी था, जो 2023-24 में घटकर 39.68 फीसदी रह गया।
गैर-खाद्य पदार्थों पर खर्च में वृद्धि
ग्रामीण क्षेत्र
2011-12 में गैर-खाद्य पदार्थों पर खर्च 47.1 फीसदी था, जो 2023-24 में बढ़कर 52.96 फीसदी हो गया।
शहरी क्षेत्र
2011-12 में यह खर्च 57.38 फीसदी था, जो 2023-24 में बढ़कर 60.32 फीसदी हो गया।
स्वास्थ्य पर असर और पोषण की कमी
इस बदलाव का स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर पड़ सकता है। भारतीयों का ध्यान अब पोषण के बजाय सौंदर्य प्रसाधनों और साफ-सफाई पर ज्यादा केंद्रित हो रहा है, जिससे उनकी आहार संबंधी प्राथमिकताएं प्रभावित हो सकती हैं। दाल और अनाज जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थों की खपत में कमी से दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं, जैसे कि पोषण की कमी और संबंधित रोग।
