हाल ही में ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय (UBC) की एक नई स्टडी में यह पाया गया है कि जलवायु परिवर्तन के कारण ठंडे खून वाले जीवों में बैक्टीरिया, फंगल और अन्य संक्रमणों का खतरा बढ़ रहा है। इन जीवों में संक्रमण से होने वाली मृत्यु दर सामान्य तापमान के मुकाबले अधिक बढ़ जाती है, खासकर तब जब तापमान ज्यादा बढ़ जाता है। इस स्टडी में 60 प्रयोगों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया है कि ठंडे खून वाले जीव तापमान में परिवर्तन के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होते हैं।
ठंडे खून वाले जीवों की तापमान संवेदनशीलता
ठंडे खून वाले जीव, जैसे मछलियां, सरीसृप, उभयचर और कुछ अन्य अकशेरुकी, अपने शरीर का तापमान बाहरी वातावरण से नियंत्रित करते हैं। ऐसे जीवों के लिए एक स्थिर तापमान बेहद महत्वपूर्ण होता है, ताकि वे अपनी जीवन प्रक्रियाओं को सही ढंग से चला सकें। ये जीव बढ़ते तापमान के प्रभावों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं क्योंकि उनकी शारीरिक क्रियाएं सीधे तौर पर वातावरण के तापमान पर निर्भर करती हैं।
अधिक तापमान में मृत्यु दर में वृद्धि
शोधकर्ताओं ने सांख्यिकीय मॉडल का उपयोग करके 50 प्रजातियों पर स्टडी किया। इसका परिणाम यह रहा कि जब ठंडे खून वाले जीव सामान्य पर्यावरणीय तापमान से अधिक गर्मी में आते हैं, तो इनकी मृत्यु दर सामान्य स्थितियों की तुलना में ज्यादा होती है। इस स्टडी में विशेष रूप से फंगल रोगजनकों के प्रभाव का अध्ययन किया गया, और यह पाया गया कि जब तापमान फंगल संक्रमण की आदर्श सीमा से अधिक बढ़ता है, तो संक्रमित जीवों की मृत्यु दर में तेजी आती है।
थर्मल ऑप्टिमम बिंदु और संक्रमण की संभावनाएं
स्टडी में यह भी दिखाया गया कि कुछ मामलों में जब तापमान इतना बढ़ जाता है कि संक्रमण करने वाले कवक खुद मर जाते हैं, तब संक्रमित जीवों की मृत्यु दर में कमी देखी जाती है। इसे थर्मल ऑप्टिमम बिंदु कहा जाता है। इस बिंदु के पार जाने पर कवक का प्रभाव घट जाता है, लेकिन इससे जीवों पर संक्रमण के दुष्प्रभाव और भी गंभीर हो सकते हैं, खासकर जब जीव गर्मी के तनाव को सहन नहीं कर पाते।
पारिस्थितिकी तंत्र पर असर और जैव विविधता का नुकसान
यह शोध जलवायु परिवर्तन के कारण पारिस्थितिकी तंत्र और जैव विविधता पर पड़ने वाले प्रभावों को रेखांकित करता है। कोरल, मछलियाँ और अन्य समुद्री जीव, जो कि ठंडे खून वाले होते हैं, संक्रमणों के कारण तेजी से मर रहे हैं, जिससे समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र और जैव विविधता को गंभीर नुकसान हो सकता है। इन परिणामों से यह स्पष्ट है कि जलवायु परिवर्तन के कारण जीवों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव बढ़ने की संभावना है, जो पारिस्थितिकी तंत्र को असंतुलित कर सकता है।
