प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) ने कैंसर रोगियों का वित्तीय बोझ महत्वपूर्ण रूप से कम किया है। प्रधानमंत्री ने अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 117वें एपिसोड में मलेरिया और कैंसर से संबंधित प्राप्त उपलब्धियों को साझा किया। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में सफलता ने आज पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित किया है।
कैंसर के इलाज में आयुष्मान भारत योजना का योगदान

कैंसर से लड़ाई के बारे में बात करते हुए प्रधानमंत्री ने लांसेट मेडिकल जर्नल के अध्ययन का उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि भारत में कैंसर का इलाज समय पर शुरू करने की संभावना में भारी बढ़ोतरी हुई है। मोदी ने आयुष्मान भारत योजना की भूमिका पर भी जोर दिया, जो कैंसर के रोगियों को 30 दिनों के भीतर उपचार सुनिश्चित करती है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस योजना की वजह से 90 प्रतिशत कैंसर रोगी समय पर इलाज शुरू कर पा रहे हैं। पहले गरीब मरीज पैसों की कमी के कारण कैंसर जांच और इलाज से बचते थे, लेकिन अब आयुष्मान भारत योजना उनके लिए बड़ी मदद बन गई है। अब वे आगे आकर अपना इलाज करवाने में सक्षम हो रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस योजना ने कैंसर के इलाज में वित्तीय समस्याओं को काफी हद तक कम किया है।
मलेरिया से मुकाबला: एक लंबी लड़ाई
प्रधानमंत्री मोदी ने मलेरिया को 4,000 वर्षों से मानवता का एक बड़ा चुनौती बताते हुए कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के समय भी यह एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या थी। उन्होंने बताया कि मलेरिया बच्चों में होने वाली मौतों के मामले में तीसरे स्थान पर है। आज मैं संतोष के साथ कह सकता हूं कि देशवासियों ने इस चुनौती से सामूहिक रूप से और मजबूती से मुकाबला किया है।
उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा, भारत में 2015 से 2023 तक मलेरिया के मामलों और मौतों में 80 प्रतिशत की कमी आई है।
मलेरिया पर नियंत्रण में सामूहिक प्रयास
प्रधानमंत्री मोदी ने इस सफलता के पीछे सबकी भागीदारी को अहम बताया और खासकर असम के जोरहाट के चाय बगान मजदूरों और हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के लोगों का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने मलेरिया के खिलाफ अभियान को और तेज किया।
जोरहाट के चाय बगानों में मलेरिया चार साल पहले तक बड़ी समस्या थी। लेकिन जब वहां के लोग एकजुट होकर इसे खत्म करने के लिए आगे आए, तो उन्हें काफी सफलता मिली। इस प्रयास में उन्होंने तकनीकी मदद के साथ-साथ सोशल मीडिया का भी भरपूर उपयोग किया।
प्रधानमंत्री ने आगे बताते हैं कि इसी तरह कुरुक्षेत्र जिले में मलेरिया पर नियंत्रण के लिए एक बेहतरीन मॉडल प्रस्तुत किया गया। यहां सार्वजनिक भागीदारी के जरिए मलेरिया की निगरानी में सफलता मिली। सड़कों पर नाटक और रेडियो के माध्यम से लोगों को जागरूक किया गया, जिससे मच्छरों के प्रजनन को काफी हद तक कम किया जा सका।
