हाल ही में क्वींसलैंड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने एक महत्वपूर्ण स्टडी के परिणामों को साझा करते हुए दावा किया है कि पानी में मौजूद फ्लोराइड बच्चों के मानसिक विकास को प्रभावित नहीं करता। यह स्टडी जर्नल ऑफ डेंटल रिसर्च में प्रकाशित हुआ है, जिसमें फ्लोराइड के बच्चों के मस्तिष्क विकास पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में नई जानकारी सामने आई है।
फ्लोराइड और मानसिक विकास का संबंध

आमतौर पर दांतों की सड़न को रोकने के लिए कई देशों में पीने के पानी में फ्लोराइड मिलाया जाता है। क्वींसलैंड विश्वविद्यालय के प्रमुख शोधकर्ता, प्रोफेसर लॉक डो ने इस स्टडी में 357 युवाओं के आईक्यू स्कोर का मूल्यांकन किया, जो 16 से 26 वर्ष की आयु के थे। ये युवा 2012 से 2014 के बीच हुए नेशनल चाइल्ड ओरल हेल्थ स्टडी में शामिल थे। स्टडी का उद्देश्य यह पता लगाना था कि क्या फ्लोराइड के संपर्क से मस्तिष्क विकास पर कोई नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
स्टडी के नतीजे
स्टडी के परिणामों से यह स्पष्ट हुआ कि फ्लोराइडयुक्त पानी पीने वाले युवाओं का औसत आईक्यू उन युवाओं से 1.07 अंक अधिक था, जिन्होंने फ्लोराइडयुक्त पानी नहीं पीया था। इसके अलावा फ्लोराइड के उच्च स्तर के संपर्क में आने वाले व्यक्तियों में डेंटल फ्लोरोसिस (दांतों में फ्लोराइड के कारण होने वाली समस्या) के बावजूद आईक्यू स्कोर औसतन 0.28 अंक अधिक था।
प्रोफेसर डो ने इस संबंध में कहा, हमारे परिणाम यह स्पष्ट करते हैं कि फ्लोराइड का मानसिक विकास पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता। उन्होंने यह भी कहा कि यह स्टडी उन दावों को नकारता है, जो फ्लोराइड को बच्चों के मस्तिष्क के लिए हानिकारक मानते हैं।
दांतों की सड़न में रोकथाम

स्टडी से जुड़े अन्य शोधकर्ता, डॉक्टर डीप हा ने बताया कि फ्लोराइड युक्त पानी दांतों की सड़न से बचाव में अत्यंत प्रभावी है। उनका कहना था कि ऑस्ट्रेलिया की लगभग 90% आबादी फ्लोराइडयुक्त पानी का उपयोग करती है, लेकिन कई दूरदराज के क्षेत्रों में यह सुविधा उपलब्ध नहीं है। दांतों की सड़न बच्चों में होने वाली एक सामान्य बीमारी है, जो लंबे समय तक परेशानी का कारण बन सकती है और कभी-कभी दांतों को निकालने की आवश्यकता भी हो सकती है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
