नेटफ्लिक्स इंडिया पर स्ट्रीम हो रही हनी सिंह की डॉक्यूमेंट्री ने उनके जीवन के कुछ अज्ञात पहलुओं को उजागर किया है। हनी सिंह, जो 2012 में अपने गानों “ब्राउन रेंज” और “ब्लू आइज़” से लोकप्रियता की ऊंचाइयों तक पहुंचे, ने इस डॉक्यूमेंट्री में खुलासा किया कि बाइपोलर डिसऑर्डर के कारण उनका जीवन पूरी तरह से बदल गया। वे न केवल मानसिक संघर्षों से जूझने लगे, बल्कि नशे के आदी भी हो गए। हनी सिंह ने इस बीमारी को तनाव से भी ज्यादा गंभीर बताया और कहा कि वे नहीं चाहते कि यह किसी और के साथ हो।

बाइपोलर डिसऑर्डर क्या है?

बाइपोलर डिसऑर्डर एक मानसिक स्वास्थ्य स्थिति है, जिसमें व्यक्ति के मूड, ऊर्जा और व्यवहार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव होते हैं। इसे पहले मैनिक-डिप्रेसिव इलनेस कहा जाता था। इसमें व्यक्ति मैनिक (उत्तेजना) और डिप्रेसिव (अवसाद) एपिसोड्स के बीच बदलता रहता है, जो उसकी जिंदगी को प्रभावित करते हैं।

बाइपोलर डिसऑर्डर के प्रकार

बाइपोलर डिसऑर्डर I: इसमें मैनिक एपिसोड्स गंभीर होते हैं।

बाइपोलर डिसऑर्डर II: इसमें हल्के मैनिक (हाइपोमेनिया) और गंभीर डिप्रेसिव एपिसोड्स होते हैं।

साइक्लोथाइमिक डिसऑर्डर: इसमें हल्के मैनिक और डिप्रेसिव लक्षण होते हैं, जो लंबे समय तक बने रहते हैं।

बाइपोलर डिसऑर्डर के लक्षण

बाइपोलर डिसऑर्डर के लक्षण मैनिक और डिप्रेसिव एपिसोड्स के दौरान अलग-अलग होते हैं।

मैनिक एपिसोड (उत्तेजना के समय)

अत्यधिक खुश या चिड़चिड़ा मूड।

अत्यधिक बोलना और सामाजिक रूप से अधिक सक्रिय होना।

कम नींद में भी ऊर्जा से भरपूर रहना।

जोखिम भरे व्यवहार, जैसे अचानक खर्च करना या खतरनाक फैसले लेना।

आत्मविश्वास में अत्यधिक वृद्धि, खुद को शक्तिशाली समझना।

डिप्रेसिव एपिसोड (अवसाद के समय)

लगातार उदासी या खालीपन का अनुभव।

थकान और ऊर्जा की कमी।

ध्यान केंद्रित करने या निर्णय लेने में कठिनाई।

आत्महत्या के विचार आना।

जीवन में रुचि खो देना।

मिश्रित एपिसोड

मैनिक और डिप्रेसिव लक्षण एक साथ हो सकते हैं, जो स्थिति को और भी जटिल बना देते हैं।

दमा मरीजों के लिए रूम हीटर का खतरा

बाइपोलर डिसऑर्डर से जूझ रहे हनी सिंह की डॉक्यूमेंट्री में यह भी बताया गया कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों के अलावा, अन्य स्वास्थ्य समस्याएं जैसे अस्थमा भी गंभीर हो सकती हैं। दमा मरीजों के लिए रूम हीटर का अत्यधिक उपयोग उनकी सेहत पर प्रतिकूल असर डाल सकता है, जिससे अस्थमा की स्थिति खराब हो सकती है।

डॉक्टर से कब संपर्क करें?

जब मूड का उतार-चढ़ाव रोजमर्रा की जिंदगी में समस्या बनने लगे।

अगर आत्महत्या के विचार आ रहे हों, तो तुरंत मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करें।

अगर व्यक्ति का व्यवहार अत्यधिक बदल रहा हो या सामाजिक संबंधों में दिक्कत आ रही हो, तो इलाज जरूरी है।

इलाज

बाइपोलर डिसऑर्डर का इलाज संभव है। इसमें थेरेपी, दवाएं (जैसे लिथियम, एंटी-डिप्रेसेंट्स) और जीवनशैली में बदलाव की सलाह दी जाती है। समय पर विशेषज्ञ की मदद लेने से व्यक्ति इस स्थिति से उबर सकता है और एक सामान्य जीवन जी सकता है।

By tnm

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