टीम इंडिया के पूर्व क्रिकेटर विनोद कांबली इन दिनों गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। 21 दिसंबर को उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें ठाणे के अक्रुति हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। जांच में यह पुष्टि हुई कि कांबली के दिमाग में खून का थक्का (ब्लड क्लॉट) बन गया है। इससे पहले कांबली को यूरिन इंफेक्शन और लगातार क्रैम्प्स की समस्या हो रही थी, जिसके बाद उन्हें भिवंडी के काल्हेर हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। बाद में उनकी स्थिति गंभीर होने पर उन्हें ठाणे के अस्पताल में शिफ्ट किया गया, जहां कई टेस्ट किए गए। डॉक्टर विवेक त्रिवेदी के अनुसार कांबली की हालत फिलहाल स्थिर है, लेकिन वे डॉक्टरों की निगरानी में हैं और अगले कुछ दिनों में अन्य आवश्यक जांचें की जाएंगी।

क्या है ब्लड क्लॉटिंग?

ब्लड क्लॉटिंग वह स्थिति है, जब शरीर में खून का थक्का जम जाता है, जिससे रक्त प्रवाह में रुकावट आ जाती है। यदि यह थक्का दिमाग में बनता है, तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती है, क्योंकि इससे मस्तिष्क में रक्त और ऑक्सीजन का प्रवाह रुक जाता है। यह मस्तिष्क की कोशिकाओं को नष्ट कर सकता है, जिससे स्ट्रोक, चक्कर आना, या बेहोशी जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। समय पर इलाज न होने पर यह जानलेवा भी हो सकता है।

ब्लड क्लॉटिंग के कारण

विनोद कांबली में ब्लड क्लॉटिंग की समस्या के संभावित कारणों में उनकी 2013 में की गई हार्ट सर्जरी, उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर), और जीवनशैली से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। अनियमित खानपान, शारीरिक गतिविधियों की कमी और उम्र बढ़ने से भी इस समस्या का खतरा बढ़ जाता है।

ब्लड क्लॉटिंग का इलाज

ब्लड क्लॉटिंग का इलाज रोग की गंभीरता और थक्के के स्थान के आधार पर किया जाता है। आमतौर पर निम्नलिखित उपचार अपनाए जाते हैं।

थ्रॉम्बोलिटिक दवाएं

यह दवाएं खून के थक्के को घोलने का काम करती हैं, जिन्हें क्लॉट-बस्टर भी कहा जाता है।

एंटीकोआगुलेंट दवाएं

हिपारिन और वारफेरिन जैसी दवाएं खून को पतला करके थक्के को बढ़ने से रोकती हैं।

सर्जिकल इंटरवेंशन

गंभीर मामलों में थक्के को हटाने के लिए सर्जरी (थ्रॉम्बेक्टॉमी) की जा सकती है।

कैथेटर-आधारित थेरेपी

इसमें थक्का निकालने या दवा पहुंचाने के लिए कैथेटर का इस्तेमाल किया जाता है।

लाइफस्टाइल सुधार

ब्लड क्लॉटिंग को नियंत्रित करने के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, और तनाव प्रबंधन जरूरी हैं। इन उपायों से रक्त प्रवाह बेहतर होता है और थक्के बनने की संभावना कम होती है।

By tnm

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