बिहार के गंगा के मैदानी इलाकों में हाल ही में एक गंभीर पर्यावरणीय समस्या का पता चला है, जो कैंसर के मामलों के बढ़ने का कारण बन रही है। पटना स्थित महावीर कैंसर संस्थान के वैज्ञानिकों की एक टीम ने अपने एक स्टडी में पाया है कि इन इलाकों में पानी में मैंगनीज की अधिक मात्रा कैंसर के विकास में योगदान दे रही है।

क्या है मैंगनीज प्रदूषण और उसका प्रभाव?

मैंगनीज एक ट्रेस एलिमेंट है, जो सामान्यत: भोजन, पानी, मिट्टी और चट्टानों में पाया जाता है। शरीर में इसकी बहुत कम मात्रा की आवश्यकता होती है, लेकिन इसकी अधिकता से स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं। बिहार के गंगा के मैदानी इलाकों में पानी में मैंगनीज का स्तर अत्यधिक बढ़ गया है, जो कैंसर का एक प्रमुख कारण बन सकता है। महावीर कैंसर संस्थान के प्रमुख वैज्ञानिक अरुण कुमार के अनुसार, मैंगनीज कैंसर के लिए विषाक्तता का नया तत्व है और पानी में इसकी उच्च मात्रा कैंसर का एक प्रमुख कारण हो सकती है।

स्टडी का निष्कर्ष

स्टडी में 1,146 कैंसर मरीजों के खून के नमूने लिए गए, जिनमें 767 महिलाएं (67%) और 379 पुरुष (33%) शामिल थे। इन मरीजों में स्तन कैंसर, हेपैटोबिलियरी और गेस्ट्रो कैंसर, गर्भाशय ग्रीवा कैंसर जैसे विभिन्न प्रकार के कैंसर के मामले थे। स्टडी में यह भी पाया गया कि कैंसर के मरीजों के खून में मैंगनीज का स्तर बहुत अधिक था, जो कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा निर्धारित सीमा से कहीं अधिक था।

विशेष रूप से जिन मरीजों का कैंसर स्टेज तीन और चार में था, उनके खून में मैंगनीज की मात्रा बहुत अधिक पाई गई। इसके अलावा इन मरीजों के घरों से लिए गए हैंडपंप के पानी में भी मैंगनीज का उच्च स्तर देखा गया। वैज्ञानिकों ने यह निष्कर्ष निकाला कि खून में मैंगनीज की मात्रा और हैंडपंप के पानी में मैंगनीज की मौजूदगी के बीच एक मजबूत संबंध है।

मैंगनीज प्रदूषण का स्रोत

मैंगनीज प्रदूषण का मुख्य स्रोत भू-जल में औद्योगिक प्रदूषण (मानवजनित कारण) या तलछटी चट्टानों (भौगोलिक कारण) से हो सकता है। 1957 में महाराष्ट्र के चिंचवड़ में मैंगनीज प्रदूषण का पहला मामला सामने आया, जब खदान मजदूरों को कमजोरी, नींद की समस्या और अन्य शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। इसके बाद, भारत के अन्य राज्यों जैसे पश्चिम बंगाल और कर्नाटक में भी भू-जल में मैंगनीज के उच्च स्तर पाए गए।

बिहार में बढ़ते कैंसर के मामले

स्टडी से यह भी स्पष्ट हुआ कि बिहार में पिछले कुछ दशकों में कैंसर के मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है। हालांकि कैंसर के पीछे कई कारण हो सकते हैं, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि मैंगनीज जैसे ट्रेस एलिमेंट का विषाक्त प्रभाव कैंसर के मामलों में वृद्धि का एक प्रमुख कारण है। यह स्टडी नेचर जर्नल में प्रकाशित हुआ है और यह पहली बार है जब बिहार में मैंगनीज प्रदूषण को कैंसर के खतरे से जोड़ा गया है।

वैज्ञानिकों की सलाह

वैज्ञानिकों का कहना है कि जल संसाधनों की गुणवत्ता की नियमित निगरानी और मैंगनीज प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए ठोस उपायों की आवश्यकता है। इसके लिए सरकार और स्थानीय प्रशासन को मिलकर काम करना होगा ताकि जल प्रदूषण के कारण होने वाली बीमारियों को रोका जा सके। इसके अलावा, लोगों को भी पानी के स्रोतों के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए ताकि वे सुरक्षित और शुद्ध पानी का उपयोग कर सकें।

By tnm

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