डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है, जिसे जीवनभर दवाओं और जीवनशैली में बदलाव के जरिए नियंत्रित किया जाता है, और यह पूरी दुनिया में लगभग 830 मिलियन लोगों को प्रभावित करती है। यह बीमारी तेजी से बढ़ रही है, लेकिन हाल ही में डायबिटीज के इलाज के लिए एक महत्वपूर्ण खोज हुई है, जो लाखों लोगों के इलाज में मदद कर सकती है। भारतीय वैज्ञानिकों ने एक बड़ा कदम उठाते हुए पारंपरिक औषधीय पौधे सुबबूल के बीज की मदद से टाइप-टू डायबिटीज से जुड़ी इंसुलिन प्रतिरोध की समस्या के इलाज की क्षमता का पता लगाया है। इस शोध में चार सक्रिय यौगिकों को विकसित किया गया है, जो डायबिटीज के उपचार में मददगार साबित हो सकते हैं।

डायबिटीज का बढ़ता हुआ खतरा

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, भारत में 18 वर्ष से अधिक आयु के करीब 7.7 करोड़ लोग टाइप-टू डायबिटीज से पीड़ित हैं, और लगभग 2.5 करोड़ लोग प्रीडायबिटिक हैं। इन आंकड़ों से यह स्पष्ट है कि मधुमेह के मामलों में तेज़ी से वृद्धि हो रही है, जिससे स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। यदि समय रहते इसका उपचार नहीं किया जाता, तो इससे दिल के दौरे, स्ट्रोक, न्यूरोपैथी और रेटिनोपैथी जैसी जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं।

सुबबूल का पारंपरिक उपयोग

सुबबूल (Leucaena leucocephala) एक तेजी से बढ़ने वाला उष्णकटिबंधीय पौधा है, जो मुख्य रूप से उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाया जाता है। इसके बीज और पत्तियों का पारंपरिक रूप से आहार में उपयोग किया जाता है, क्योंकि यह प्रोटीन और फाइबर का अच्छा स्रोत होते हैं। इसके बीज का सेवन विशेष रूप से इंसुलिन प्रतिरोध और रक्त शर्करा को नियंत्रित करने के लिए लाभकारी माना जाता है।

सुबबूल के बीज से सक्रिय यौगिकों का विकास

गुवाहाटी स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस स्टडी इन साइंस एंड टेक्नोलॉजी (IASST) के वैज्ञानिकों ने सुबबूल के बीज की जैविक गतिविधि का अध्ययन किया। शोधकर्ताओं ने बीज के विभिन्न हिस्सों की जांच की और एक सक्रिय जैव-भाग को चुना, जिससे चार नए सक्रिय यौगिक विकसित किए गए हैं। इन यौगिकों ने इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ाने में मदद की, खासकर फैटी एसिड और कंकाल की मांसपेशियों की कोशिकाओं में।

क्वेरसेटिन-तीन-ग्लूकोसाइड और एसआईआरटी1 एंजाइम

शोधकर्ताओं ने एक प्रमुख यौगिक, क्वेरसेटिन-तीन-ग्लूकोसाइड की पहचान की, जो माइटोकॉन्ड्रियल डीएसेटाइलेज एंजाइम सिर्टुइन 1 (SIRT1) को बढ़ावा देता है। यह एंजाइम ग्लूट 2 (एक प्रोटीन जो कोशिकाओं में ग्लूकोज और फ्रुक्टोज को स्थानांतरित करने में मदद करता है) को नियंत्रित करता है और इंसुलिन संवेदनशीलता को बेहतर बनाता है। शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि यह यौगिक एसआईआरटी1 अवशेषों के साथ हाइड्रोजन बॉन्ड बनाने के माध्यम से आंतरिक स्थिर क्रियाएं करता है, जिससे ग्लूकोज अवशोषण को बढ़ावा मिलता है।

अध्ययन का महत्व

यह शोध जर्नल एसीएस ओमेगा में प्रकाशित हुआ है, और यह मधुमेह के इलाज के लिए एक नई दिशा प्रदान करता है। इसके द्वारा किया गया अध्ययन यह बताता है कि सुबबूल के बीज का उपयोग टाइप-टू डायबिटीज और इससे संबंधित बीमारियों के इलाज में किया जा सकता है। इस पौधे के सक्रिय यौगिकों का उपयोग ग्लूकोज अवशोषण बढ़ाने और इंसुलिन प्रतिरोध को नियंत्रित करने में प्रभावी साबित हो सकता है।

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

By tnm

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