आईआईटी मद्रास के एक बहु-विषयक टीम द्वारा किया गया यह रिसर्च, जिसमें भारत, ऑस्ट्रेलिया, यू.एस., रोमानिया और दक्षिण अफ्रीका के शोधकर्ता शामिल थे, और चेन्नई स्थित मेडिस्कैन सिस्टम्स और सेवाथा मेडिकल कॉलेज अस्पताल से चिकित्सा सहयोग प्राप्त हुआ, मानव भ्रूण मस्तिष्क की उच्च-रिज़ॉल्यूशन 3D छवियां प्रदान करता है। यह रिसर्च भारतीय संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत में हर साल लगभग 25 मिलियन बच्चों का जन्म होता है, जो दुनिया का पांचवां हिस्सा है।
इससे भारत को भ्रूण से लेकर युवा वयस्क तक मस्तिष्क के विकास को समझने में मदद मिलती है, साथ ही विकासात्मक विकारों जैसे कि लर्निंग डिसेबिलिटी और ऑटिज़्म पर अधिक शोध करने का अवसर मिलता है।
रिसर्च नेतृत्व और सहयोग
यह शोध आईआईटी मद्रास के सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर के प्रमुख मोहनेसंकर शिवप्रकाशम द्वारा नेतृत्व किया गया था। इसे भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय, क्रिस गोपालकृष्णन, आईटी इंफोसिस, प्रीमजी इन्वेस्ट, फोर्टिस हेल्थकेयर, और एगिलस डायग्नोस्टिक्स से समर्थन प्राप्त हुआ। इसके अलावा एनवीडिया जैसी प्रमुख कंपनियों ने डेटा प्रोसेसिंग के लिए सहयोग किया, जिससे पेटाबाइट्स में डेटा प्रोसेस किया गया।
मस्तिष्क छवियों के मुख्य अनुप्रयोग
इस उच्च-रिज़ॉल्यूशन भ्रूण मस्तिष्क छवियों के निर्माण से वर्तमान भ्रूण इमेजिंग प्रौद्योगिकियों में सुधार होगा, जिससे विकासात्मक विकारों का शीघ्र निदान और उपचार संभव होगा। इन आंकड़ों का इस्तेमाल चिकित्सा क्षेत्र में अत्यधिक प्रभावी साबित होगा, खासकर बचपन के मस्तिष्क विकास और विकारों के इलाज में।
सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर की भूमिका
आईआईटी मद्रास ने 2022 में सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर की स्थापना की, जिसका उद्देश्य मस्तिष्क के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करना और मानव मस्तिष्क को कोशिका स्तर पर मानचित्रित करना है। इस सेंटर ने एक उच्च-प्रदर्शन हिस्टोलॉजी पाइपलाइन विकसित की है, जो पूरे मानव मस्तिष्क को उच्च-रिज़ॉल्यूशन डिजिटल छवियों में प्रोसेस करता है। सेंटर ने अब तक 200 से अधिक विभिन्न प्रकार और उम्र (फ्रूण, नवजात, युवा वयस्क, वृद्ध) के मस्तिष्कों को एकत्र किया है और उन्हें डिजिटल वॉल्यूम में प्रोसेस किया है।
वैश्विक नेतृत्व की दिशा में कदम
सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर ने अब तक जो डेटा इकट्ठा किया है, वह वैश्विक स्तर पर सबसे बड़े मस्तिष्क डेटा रिपॉजिटरी के रूप में उभर सकता है, जो आने वाले दशकों के लिए एक वैश्विक संदर्भ के रूप में काम करेगा।
