दिल्ली के रघुबीर नगर में स्थित अखिल भारतीय नेत्रहीन संघ स्कूल के दृष्टिबाधित बच्चों को कचरे की अवैध डंपिंग और खुले सीवेज गड्ढों के कारण गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इन बच्चों को पहले ही देख पाने में कठिनाई होती है और अब कचरे और गड्ढों के कारण उनके लिए आसपास का वातावरण और भी खतरनाक हो गया है। इस स्थिति पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने संज्ञान लिया और दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को निर्देश दिया कि वह एक महीने के भीतर इस स्कूल को 20 लाख रुपए का मुआवजा भुगतान करें।

कचरे के ढेर और खुले सीवेज से उत्पन्न खतरे

स्कूल के आसपास सड़कों पर फैला कचरा और खुले सीवेज गड्ढे बच्चों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो रहे हैं। नेत्रहीन बच्चे पहले ही दृष्टिहीनता के कारण मुश्किलों का सामना कर रहे हैं और अब कचरे के ढेर और गड्ढों के कारण उन्हें मच्छरों और कीड़ों से भी निपटना पड़ रहा है। यह स्थिति उनके रहने और खाने-पीने के स्थान को एक दुःस्वप्न में बदल चुकी है। स्कूल के पास फैलने वाला कचरा सीधे भोजन कक्ष को प्रभावित कर रहा है, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरे उत्पन्न हो रहे हैं।

अदालत का निर्देश

29 नवंबर, 2024 को दिए गए आदेश में, एनजीटी ने एमसीडी को यह निर्देश दिया कि वह एक महीने के भीतर अखिल भारतीय नेत्रहीन संघ स्कूल को 20 लाख रुपए का भुगतान करें। इस राशि का उपयोग स्कूल में पर्यावरण से जुड़ी समस्याओं और बच्चों के स्वास्थ्य को सुधारने के लिए किया जाएगा। इसके अलावा अदालत ने एमसीडी को यह आदेश दिया है कि वह ढलाव डी-5 को तुरंत बंद करे और यह सुनिश्चित करे कि स्कूल के पास कोई खुला सीवेज गड्ढा या नाला न हो।

प्रदूषणकर्ता भुगतान सिद्धांत

अदालत ने यह भी कहा कि प्रदूषणकर्ता भुगतान सिद्धांत के तहत यह मुआवजा उचित होगा। इसके तहत जो संस्था या व्यक्ति पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है, उसे इसका भुगतान करना होता है। इस मामले में एमसीडी द्वारा अवैध कचरा डंपिंग और सीवेज गड्ढों के कारण बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, जिसके लिए एमसीडी को जिम्मेदार ठहराया गया है।

सुरक्षा उपायों की आवश्यकता

अदालत ने एमसीडी को तीन महीने के भीतर इस मामले में कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत करने का भी आदेश दिया। यदि एमसीडी ने कचरे और सीवेज के गलत तरीके से निपटान को जारी रखा, तो दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) को इस मामले में कार्रवाई करनी होगी और पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति का निर्धारण करना होगा।

चिंताजनक स्थिति

गौरतलब है कि यह मामला तब सामने आया जब 30 अप्रैल, 2024 को मिलेनियम पोस्ट में प्रकाशित एक खबर ने इस समस्या को उजागर किया था। इस खबर में बताया गया था कि 1971 से अखिल भारतीय नेत्रहीन संघ हर साल सौ से अधिक दृष्टिबाधित बच्चों को मुफ्त शिक्षा और आवास प्रदान करता है, लेकिन स्कूल के आसपास की गंदगी और खुले गड्ढे बच्चों के लिए गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा कर रहे हैं।

बच्चों की सुरक्षा में बढ़ती समस्या

यह स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है क्योंकि ये बच्चे पहले ही नेत्रहीनता से जूझ रहे हैं और अब खुले सीवेज गड्ढों और कचरे के कारण उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य पर खतरे मंडरा रहे हैं। बच्चों को स्कूल परिसर में सुरक्षित चलने फिरने में भी कठिनाई हो रही है और कई बार ये बच्चे खुले गड्ढों में गिरकर घायल भी हो चुके हैं।

By tnm

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