दिल्ली उच्च न्यायालय ने यमुना नदी के तट पर छठ पूजा करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने इस निर्णय में यमुना नदी के गंभीर प्रदूषण को मुख्य कारण बताया, जिसके कारण नदी में पूजा करने से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। याचिका में छठ पूजा पर प्रतिबंध को चुनौती दी गई थी, लेकिन न्यायालय ने नदी के जहरीले पानी के कारण संभावित बीमारियों का हवाला देते हुए इस पर कोई निर्देश जारी नहीं किया।
छठ पूजा पर प्रतिबंध को चुनौती देने वाली याचिका

यह जनहित याचिका (पीआईएल) पूर्वांचल नव निर्माण संस्थान द्वारा दायर की गई थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि पहले कोविड-19 महामारी के दौरान भी छठ पूजा की अनुमति नहीं दी गई थी और अब फिर से प्रतिबंध लगाया जा रहा है। उनका यह भी तर्क था कि दिल्ली में छठ पूजा पारंपरिक रूप से यमुना नदी के किनारे होती है, और इससे श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं।
कोर्ट का दृष्टिकोण: प्रदूषण से स्वास्थ्य जोखिम
दिल्ली उच्च न्यायालय की पीठ, जिसमें मुख्य न्यायाधीश ने नेतृत्व किया, ने याचिका खारिज करते हुए यह कहा कि यमुना नदी में प्रदूषण का स्तर इतना अधिक है कि वहां पूजा करना और पानी में स्नान करना स्वास्थ्य के लिए जोखिमपूर्ण हो सकता है। अदालत ने हाल ही में एक मामले का जिक्र किया, जिसमें एक व्यक्ति प्रदूषित पानी में स्नान करने के बाद बीमार पड़ गया और उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
अदालत ने यह भी कहा कि प्रदूषण के कारण नदी का पानी इतना जहरीला हो गया है कि उसमें नहाने से गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। इसके अलावा कोर्ट ने यह जानकारी भी दी कि दिल्ली सरकार ने पूजा के लिए 1,000 वैकल्पिक स्थल निर्धारित किए हैं, जहां लोग सुरक्षित रूप से पूजा कर सकते हैं। न्यायालय ने इस संबंध में दिल्ली सरकार के द्वारा की गई व्यवस्थाओं का भी उल्लेख किया, जिससे यह साबित हुआ कि पूजा के लिए नदी के किनारे जाने की आवश्यकता नहीं है।
नदी की सतह पर तैरते जहरीले झाग ने भक्ति को किया प्रभावित

मंगलवार को ‘नहाय खाय’ के साथ छठ पूजा की शुरुआत हुई। हालांकि दिल्ली के कालिंदी कुंज क्षेत्र में यमुना नदी के तट पर एक भयावह दृश्य सामने आया। यहां नदी की सतह पर तैरते हुए जहरीले झाग ने श्रद्धालुओं की भक्ति को प्रभावित किया। श्रद्धालुओं ने सूर्य देवता की पूजा करने के लिए नदी में पवित्र स्नान किया, जो इस त्यौहार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, लेकिन जहरीला झाग और प्रदूषण ने इस धार्मिक अनुष्ठान के पारंपरिक रूप को बिगाड़ दिया।
प्रदूषण का संकट और उसकी जटिलताएं
यमुना नदी का प्रदूषण दिल्ली और उत्तर भारत के लिए एक गंभीर समस्या बन चुकी है। नदी में प्रदूषण की वजह से जल जीवन और पारिस्थितिकी तंत्र पर गंभीर असर पड़ा है। यमुना के पानी में भारी मात्रा में रासायनिक पदार्थ, सीवेज और अन्य हानिकारक तत्व मिल गए हैं, जिनसे जल जीवन को खतरा है। इसके अलावा इस प्रदूषण का असर सीधे तौर पर मानव स्वास्थ्य पर भी पड़ता है, और इससे बीमारियों के फैलने का खतरा भी बढ़ जाता है।
दिल्ली सरकार ने यमुना नदी के प्रदूषण को कम करने के लिए कई योजनाओं पर काम किया है, लेकिन स्थिति में सुधार में बहुत समय लग रहा है। प्रदूषण की समस्या के समाधान तक, अदालत का यह फैसला लोगों को नदी में पूजा करने से बचने के लिए जागरूक करने का एक प्रयास है।
न्यायालय का निर्णय और वैकल्पिक व्यवस्था
दिल्ली उच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि लोग छठ पूजा जैसे धार्मिक अनुष्ठानों के लिए यमुना नदी के तट पर न जाएं, क्योंकि यह उनकी सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है। इसके बजाय प्रशासन ने विभिन्न घाटों और निर्दिष्ट क्षेत्रों में पूजा करने की व्यवस्था की है, जहां श्रद्धालु सुरक्षित रूप से पूजा कर सकते हैं।
यमुना के प्रदूषण संकट पर अदालत का यह निर्णय सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा देने का एक प्रयास है, ताकि लोग प्रदूषित जल से बच सकें और अपनी सेहत को प्राथमिकता दें। वहीं, दिल्ली सरकार भी इस दिशा में अपने प्रयासों को जारी रखे हुए है ताकि प्रदूषण स्तर को कम किया जा सके और लोगों के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखा जा सके।
