खराब लाइफस्टाइल, अनहेल्दी खान-पान के कारण हाल के कुछ सालों में दिल की बीमारी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। अब महिलाओं को लेकर भी एक रिपोर्ट सामने आई है। कार्डियोवैस्कुलर डिजीज या सीवीडी महिलाओं के लिए बढ़ती चिंता का एक विषय बन गया है। हार्ट अटैक और कोरोनरी आर्टरी डिजीज के कारण महिलाओं को बड़े पैमाने पर इसका नुकसान हो रहा है। गुड न्यूज टूडे के अनुसार, मैक्स हेल्थकेयर के कार्डियोलॉजी विभाग के चेयरमैन डॉ. बलबीर सिंह और मैक्स हॉस्पिटल, साकेत के इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी के डायरेक्टर डॉ. अनुपम गोयल ने अभी हाल ही में एक स्टडी की है। दिल्ली में हुए Cardiology Summa 2024 में इस स्टडी को पेश किया गया है। इसमें बताया गया कि दिल की बीमारी से होने वाली मौतों में काफी हद तक कमी आई है, लेकिन महिलाओं में इसके मामले बढ़ रहे हैं।
महिलाओं में दिल की बीमारी को लेकर चुनौतियां
आमतौर पर कोरोनरी आर्टरी डिजीज (CAD) और दिल का दौरा (मायोकार्डियल इन्फार्क्शन या MI) को मुख्य रूप से पुरुषों के साथ जोड़कर देखा जाता है। 65 साल से कम उम्र के पुरुषों में ये ज्यादा देखने को मिलता है हालांकि, इसके कारण इस तथ्य को नजरअंदाज कर दिया जाता है कि युवा महिलाएं भी इसकी चपेट में हैं। 2016 में, अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने औपचारिक रूप से स्वीकार किया था कि महिलाओं में दिल के दौरे का जोखिम ज्यादा होता है।
बायोलॉजिकल वजहों से महिलाओं में दिल की बीमारियों का जोखिम और अनुभव पुरुषों से अलग होता है। उदाहरण के लिए हार्ट अटैक के बाद महिलाओं को ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ता है। डॉक्टर बलबीर सिंह के अनुसार, हार्ट अटैक का भी पुरुष और महिला पर अलग-अलग प्रभाव पड़ता है और इसके कारण भी अलग-अलग हो सकते हैं। उनके अनुसार, महिलाएं 8-10 घंटे दिल का दर्द सहन कर सकती हैं और उतनी ही देरी से अस्पताल में पहुंचती हैं, जबकि पुरुषों में ये 4 से 5 घंटे होता है।
इस तरह की गई स्टडी
मैक्स हेल्थकेयर की इस स्टडी में पिछले साल STEMI (ST-Elevation Myocardial Infarction) वाले 319 मरीजों की जांच की गई थी जिनमें से 63 महिलाएं थी—जो कुल STEMI मरीजों का लगभग 20% थी, इसमें कई चीजें सामने आई।
देर से अस्पताल आना
महिलाओं में STEMI का इलाज में देरी एक चिंता का विषय है। इसमें लक्षण काफी आम होते हैं, जैसे- लंबे समय तक छाती में दर्द, कमजोरी, बेचैनी, और यहां तक कि गैस्ट्रिक। इन्हीं की वजह से इन लक्षणों को नजरअंदाज कर दिया जाता है। सामाजिक कारणों और दिल की बीमारी के खतरे के प्रति जागरूकता की कमी भी इसमें योगदान देती है।
उम्र का अंतर
महिलाओं में CAD पुरुषों से देर में होता है और मेनोपॉज के बाद इसके ज्यादा मामले सामने आते हैं। पुरुषों में ज्यादातर मरीज 40-65 साल की उम्र वाले थे, जबकि महिलाएं ज्यादातर 55 से 75 साल के बीच की थी हालांकि, युवा महिलाओं में भी CAD के मामले बढ़ रहे हैं।
कारण
हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और पारिवारिक इतिहास जैसी चीजों के अलावा, कई और स्थितियां हैं जैसे कि – लुपस और रूमेटोइड आर्थराइटिस आदि, कार्डियोमेटाबोलिक और डिप्रेशन भी दिल की बीमारी की एक वजह हो सकता है।
महिलाओं को ज्यादा खतरा
स्टडी से यह पता चलता है कि महिलाओं में इससे होने वाली मौत की दर भी ज्यादा है। बीपी, डायबिटीज, बैठे रहने की आदत, मेनोपॉज, हार्मोनल बदलाव, ऑटोइम्यून और पुरानी सूजन जैसी बीमारियां इसे और बढ़ा देती हैं। सामाजिक कारण और तनाव और डिप्रेशन जैसी मानसिक स्थितियां भी महिलाओं को ज्यादा प्रभावित करती हैं। इन सबको भी दिल की बीमारी से जोड़कर देखा जाता है।
ऐसे करें इससे बचाव
महिलाओं में हार्ट डिजीज के जोखिम और लक्षणों को समझना बहुत जरूरी है। इसके लिए कई कदम उठाए जा सकते हैं।
नियमित जांच करवाएं
खासकर 40 साल से ऊपर या मेनोपॉज वाली महिलाओं को नियमित रूप से हार्ट टेस्ट करवाने चाहिए। इसके अलावा, ब्लड चेकअप, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर की निगरानी रखनी चाहिए।
जागरूक रहें
ऑटोइम्यून डिजीज और रूमेटोइड आर्थराइटिस वाली महिलाओं में दिल की बीमारियां ज्यादा देखने को मिलती हैं ऐसे में इसे लेकर जागरूक रहें।
असामान्य लक्षणों को पहचान लें
अगर महिलाएं लंबे समय तक छाती में दर्द, थकावट, सांस लेने में कठिनाई, या पाचन संबंधी लक्षण अनुभव करती हैं, तो तुरंत डॉक्टर की सहायता लें।
हेल्दी लाइफस्टाइल जरूरी
हर दिन फिजिकल एक्टिविटी, अच्छी डाइट जिसमें फैट कम हो और योग या ध्यान जैसे स्ट्रेस मैनेजमेंट उपाय करें। अपना एक हेल्दी वजन बनाकर रखें, इसे न ज्यादा कम होने दें और न ही ज्यादा।
दिल की बीमारी के ट्रीटमेंट में जागरूकता और विशेष देखभाल की जरूरत है। यदि बीमारी को जल्दी पहचान लिया जाए और लाइफस्टाइल अच्छा रखा जाए तो कई हद तक इसे कम किया जा सकता है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले डॉक्टर या एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
