दिवाली और नए साल के मौके पर कमाई की लालच में चेन्नई के सात इंजीनियरिंग छात्रों ने एक गुप्त केमिस्ट्री लैब में नशीला पदार्थ बनाने की योजना बनाई थी। ये छात्र नशीला पदार्थ (methamphetamine) बनाने में लगे थे, जिसे वे यूट्यूब पर उपलब्ध ट्यूटोरियल्स की मदद से तैयार कर रहे थे। चेन्नई पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर इनके गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए सभी सात छात्रों को रंगे हाथों पकड़ा है।
गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी
पुलिस को मिली एक गुप्त सूचना के अनुसार आरोपी Kodungaiyur इलाके में एक दो मंजिला मकान में अपनी लैब चला रहे थे। पुलिस ने वहां छापेमारी की, जहां उन्हें ड्रग्स बनाने में उपयोग होने वाले कई रासायनिक पदार्थ मिले, जिनमें सोडियम हाइड्रॉक्साइड, नेफ़थॉल, एसीटोन, और हाइड्रोक्लोरिक एसिड शामिल हैं। इसके अलावा पुलिस को लैब में चश्मे, मास्क और अन्य उपकरण भी मिले, जो इस बात का संकेत थे कि ये छात्र काफी गंभीरता से इस अवैध गतिविधि में लगे थे।
छात्रों की पृष्ठभूमि
पुलिस ने बताया कि ये सभी छात्र साइंस ग्रेजुएट हैं और पढ़ाई में काफी अच्छे प्रदर्शन के लिए जाने जाते हैं। हालांकि उन्होंने दिवाली और नए साल पर जल्दी और मोटी कमाई के लालच में यह अवैध काम करना शुरू किया। उनके परिवार वालों को इस बात की बिल्कुल भी जानकारी नहीं थी कि उनके बच्चे क्या कर रहे हैं। यह सुनकर परिजनों में चिंता और हैरानी का माहौल है।
पुलिस अब छात्रों के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड को खंगालने की प्रक्रिया में है। उनके परिजनों के बयान भी लिए जा रहे हैं ताकि यह पता चल सके कि उन्होंने अब तक किसे नशीला पदार्थ बेचा और उनके संपर्क में कौन-कौन लोग थे। इसके लिए पुलिस उनके मोबाइल रिकॉर्ड भी खंगाल रही है।
सामाजिक और कानूनी मुद्दे
यह घटना न केवल एक गंभीर अपराध है, बल्कि यह समाज में बढ़ते नशे के प्रति एक चेतावनी भी है। कॉलेज के छात्रों का इस तरह के अवैध कार्यों में संलग्न होना बेहद चिंताजनक है। यह सवाल उठता है कि आखिर पढ़ाई के साथ-साथ छात्रों को क्या सही दिशा में मार्गदर्शन नहीं मिल पा रहा है? क्या शिक्षा प्रणाली में कहीं कमी है, जिससे छात्रों को इस तरह के अवैध कार्यों में शामिल होने का अवसर मिलता है?
पुलिस की कार्यवाही
पुलिस ने सातों छात्रों को गिरफ्तार कर लिया है और उनसे पूछताछ जारी है। उनके खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या ये छात्र किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा थे या यह एक एकल घटना थी।
