नवजात शिशु की सेहत के लिए चौथे महीने की जांच जरूरी मानी जाती है। डॉक्टर इस दौरान शिशु के विकास के माइलस्टोन पर भी ध्यान देते हैं, जैसे हाथों और पैरों की गति, शारीरिक प्रतिक्रिया जैसे मुस्कुराना या आवाज निकालना। अगर शिशु इन माइलस्टोन तक नहीं पहुंच पाता है, तो डॉक्टर इस पर माता-पिता से बात करते हैं और उन्हें जरूरी सुझाव देते हैं। नियमित जांच से संभावित समस्याओं का समय रहते ही आसानी से पता लगाया जा सकता है, जिससे शिशु का संपूर्ण विकास सुनिश्चित हो सके। कई बीमारियां और शारीरिक समस्याएं ऐसी होती हैं, जिनका समय पर पता लगाकर बढ़ने से रोका जा सकता है। इस आर्टिकल के जरिए जानते हैं कि शिशु के विकास के लिए चौथे महीने की जांच क्यों जरूरी है और इस दौरान कौन से टीके और जांच करवाई जानी चाहिए।
शिशु के लिए इसलिए जरुरी है चौथे महीने की जांच
चौथे महीने की जांच नवजात शिशु के स्वस्थ विकास के लिए जरूरी है। इस चरण में शिशु का शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास तेजी से होता है, इसलिए डॉक्टर यह सुनिश्चित करते हैं कि शिशु का विकास सामान्य रूप से हो। चौथे महीने की जांच के दौरान, डॉक्टर शिशु के वजन, और लंबाई का माप लेते हैं, ताकि यह देखा जा सके कि शिशु की ग्रोथ उसकी उम्र के अनुसार हो रही है या नहीं। यह माप शिशु के पोषण और विकास के बारे में जानकारी देता है। साथ ही, इस जांच में डॉक्टर शिशु की आंखों की रोशनी, सुनने की क्षमता और शारीरिक प्रतिक्रिया की भी जांच करते हैं। इसके अलावा, चौथे महीने पर शिशु को कुछ टीके लगाए जाते हैं, जो उसे कई बीमारियों से सुरक्षित रखने में मदद करते हैं। इनमें डिप्थीरिया, टिटनस, पर्टुसिस, हेपेटाइटिस-बी और पोलियो के टीके शामिल होते हैं। ये टीके शिशु की इम्यूनिटी को बढ़ाते हैं और उसे गंभीर बीमारियों से भी बचाते हैं।
चौथे महीने में शिशु के लिए जरूरी हैं ये टीके
इस दौरान शिशु को कुछ जरूरी वैक्सीन लगाई जाती हैं, जो उसे गंभीर बीमारियों से बचाने में मदद करती हैं।
एचआईबी (HIB) वैक्सीन
यह हेमोफिलस इन्फ्लुएंजा टाइप-बी नाम के बैक्टीरिया से सुरक्षा देती है, जो शिशु के फेफड़ों और ब्रेन में गंभीर संक्रमण का कारण बन सकता है।
न्यूमोकोकल वैक्सीन
यह न्यूमोकोकल बैक्टीरिया से बचाव करती है, जो निमोनिया, मेनिन्जाइटिस और ब्लड इंफेक्शन का कारण बन सकते हैं।
डीपीटी (DPT) वैक्सीन
यह वैक्सीन तीन बीमारियों से बचाव करती है – डिप्थीरिया (गले में संक्रमण), पर्टुसिस (काली खांसी) और टिटनस। पोलियो वैक्सीन, पोलिया नाम की गंभीर बीमारी से शिशु की रक्षा करती है। पोलिया के कारण शिशु के अंगों में पैरालिसिस हो सकता है इसलिए बचाव के लिए वैक्सीन जरूरी है।

रोटावायरस वैक्सीन
यह रोटावायरस से बचाती है, जो शिशु में गंभीर डायरिया (दस्त) का कारण बन सकता है।
हेपेटाइटिस-बी
यह वैक्सीन शिशु को हेपेटाइटिस-बी वायरस से बचाती है, जो लिवर की बीमारियों का कारण बन सकता है।
चौथे महीने में शिशु की करवाएं जांच
इस दौरान शिशु की जरूरी जांच करवाना उसके स्वस्थ विकास के लिए जरूरी हैं। इस समय डॉक्टर शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास का आंकलन करते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि वह अपने माइलस्टोन तक पहुंच रहा है या नहीं।
हड्डियां और मांसपेशियां की जांच
डॉक्टर यह सुनिश्चित करते हैं कि शिशु की मांसपेशियां और हड्डियां सही तरीके से विकसित हो रही हैं। शिशु की गर्दन को सहारा देना, हाथ और पैर की गतिविधियों को देखना इस दौरान जरूरी है। शिशु की पकड़ने और चलने की क्षमता की भी जांच की जाती है।
शिशु की प्रतिक्रियाओं की जांच
इस उम्र में शिशु का मुस्कुराना, आवाजें निकालना और दूसरों की ओर ध्यान देना उसकी मानसिक और सामाजिक ग्रोथ का संकेत होता है। डॉक्टर शिशु की इन प्रतिक्रियाओं की अच्छे से जांच करते हैं।

टीकों की जांच
डॉक्टर यह सुनिश्चित करते हैं कि शिशु को समय पर सभी जरूरी टीके लग चुके हैं या नहीं। चौथे महीने में दिए गए टीके शिशु को गंभीर बीमारियों से बचाने में मदद करेंगे।
वजन और लंबाई
डॉक्टर शिशु का वजन और लंबाई मापते हैं, जिससे यह देखा जा सके कि वह उम्र के अनुसार सही ढंग से बढ़ रहा है या फिर नहीं। सिर के आकार का भी इस दौरान माप लिया जाता है, क्योंकि यह दिमागी विकास का सूचक होता है।
आंखों और कानों की जांच
डॉक्टर शिशु की आंखों और कानों की जांच करते हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि वह सही तरह से देख और सुन पा रहा है या फिर नहीं।

इस तरह चौथे महीने में जरूरी जांच करवाकर आप शिशु की अच्छी ग्रोथ का ध्यान रख सकते हैं।
