चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डीवाई चंद्रचूड़ को हर कोई जानता है। उन्होंने अपनी दोनों बेटियों की बीमारी को लेकर बात की। उन्होंने कहा कि उनकी दोनों बच्चियों को रेयर कॉन्जेनाइटल डिसऑर्डर है, जिसे ‘नेमालाइन मायोपैथी’ कहते हैं। ये इस तरह की मेडिकल कंडीशन है जिससे मसल प्रोटीन को नुकसान पहुंचता है, और मांसपेशियों में कमजोरी आने लगती है।
Rare Muscle Disorder
उन्होंने बताया कि इस वजह से उनकी फैमली को इमोशल चैलेंज का सामना करना पड़ रहा है और उनकी बेटियों को भी बायोप्सी जैस दर्द भरे डायग्नोसिस को झेलना पड़ता है। फिलहाल अभी इस बीमारी का कोई पुख्ता इलाज नहीं है, लेकिन फिजियोथेरेपी और रिस्पिरेटरी सपोर्ट ट्रीटमेंट्स इस डिसऑर्डर को मैनेज करने में मदद कर सकते हैं।
Nemaline Myopathy

एकपर्ट्स का कहना है कि नेमालाइन मायोपैथी एक रेयर जेनेटिक मसल डिसऑर्डर है, इसमें मसल फाइबर के अंदर धागे जैसी संरचनाओं की मौजूदगी हो जाती है। इस वजह से आपके चलने फरने और काम करने की क्षमता ठीक नहीं रहती। आपको बता दें कि ये कई तरह के जीन म्यूटेशन के कारण होता है।
इसका सबसे गंभीर रूप जिंदगी के पहले साल में अहम मांसपेशियों की कमजोरी और सांस लेनें में तकलीफ होना है और कई मामलों में मरीज की मौत होने की भी संभावनाएं हैं। अगर माइल्ड डिसऑर्डर है तो इससे जान को कोई खतरा नहीं है। लेकिन ये जिंदगी मुश्किल जरूर कर देता है।
Challenges while Diagnosis
सबसे पहली चुनौती है कि ये अपने आप में एक दुर्लभ बीमारी है, जिस वजह से इसका इलाज नहीं है। इसी वजह से इसे मस्कुलर डिसऑर्डर समझ लिया जाता है। जांच के लिए बायोप्सी की जरूरत पड़ती है, जिसके लिए डॉक्टर्स को काफी सावधानी बरतनी पड़ती है।
Treatment
जैसा कि ऊपर बताया गया है कि इसका कोई पक्का और पूरी तरह इलाज नहीं है, लेकिन इसको लेकर साइंटिस्ट्स की रिसर्च जारी है। मरीज के लिए फिजियोथेरेपी और मसल स्ट्रेंथनिंग जैसे सपोर्टिव केयर काफी मददगार साबित होते हैं।
कुछ दवाइयां होती हैं जो जेनेटिक म्यूटेशन को टारगेट करती हैं, लेकिन ये काफी नहीं हैं। फिजियोथेरेपिस्ट हाथों और पैरों की ताकत बढ़ाने में मदद करते हैं और पल्मोनोलॉजिस्ट देखते हैं कि मरीज को सांस लेने में कोई तकलीफ न हो। साथ में परिवार का सपोर्ट और उनका स्ट्रोंग रहना बहुत जरूरी है, ताकि मरीज कमजोर न महसूस करे।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
