डिप्थीरिया जिसे आमतौर पर गलघोटू के नाम से जाना जाता है, एक बार फिर से एक गंभीर समस्या बनकर उभरी है। 70 के दशक तक यह बीमारी दुनिया भर में घातक मानी जाती थी, लेकिन अब यह फिर से लौट आई है। हाल ही में पंजाब में एक तीन साल की बच्ची की मृत्यु के बाद, राजस्थान के डीग में इस बीमारी से एक महीने के भीतर 7 बच्चों की मौत हो गई है। इसके अलावा इस क्षेत्र में 24 अन्य बच्चे भी संक्रमित पाए गए हैं। बढ़ते मामलों को देखते हुए, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और चिकित्सा विभाग की टीमें राजस्थान पहुंच गई हैं और गांव-गांव में बच्चों का टीकाकरण अभियान शुरू कर दिया है।
डिप्थीरिया क्या है
डिप्थीरिया एक गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण है, जो मुख्य रूप से गले और श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है। यह Corynebacterium diphtheriae नामक बैक्टीरिया के कारण होता है। संक्रमण तेजी से फैल सकता है और यदि समय पर इलाज नहीं किया गया, तो यह जानलेवा हो सकता है।
राजस्थान में इस बीमारी का फैलाव
राजस्थान में डिप्थीरिया मुख्य रूप से 16 साल तक के बच्चों को प्रभावित करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि कई परिवार बुखार के डर से अपने बच्चों का टीकाकरण नहीं कराते, जिससे बच्चों में इस बीमारी के फैलने का खतरा बढ़ जाता है। विशेष रूप से मेवात क्षेत्र में जागरूकता की कमी के कारण टीकाकरण की दर कम है, जिसके परिणामस्वरूप बच्चे इस जानलेवा बीमारी की चपेट में आ गए हैं।
क्या है डिप्थीरिया के लक्षण
गले में तेज दर्द या सूजन होना
हल्का या मध्यम बुखार आना
गले, टॉन्सिल या नाक में सफेद या भूरे रंग की मोटी झिल्ली बनना
सांस लेने में कठिनाई होना
गर्दन और गले के आसपास सूजन होना
कर्कश आवाज आना
अत्यधिक कमजोरी और थकान महसूस होना
डिप्थीरिया के कारण
डिप्थीरिया मुख्य रूप से Corynebacterium diphtheriae बैक्टीरिया से फैलता है। यह संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से हवा में फैल सकता है। निकट संपर्क या संक्रमित व्यक्ति की वस्तुओं के उपयोग से भी यह संक्रमण हो सकता है। जिन लोगों को बचपन में डिप्थीरिया का टीका नहीं लगाया गया है, उन्हें इस बीमारी का अधिक खतरा होता है।
डिप्थीरिया का इलाज
एंटीटॉक्सिन
बैक्टीरिया द्वारा छोड़े गए टॉक्सिन को निष्क्रिय करने के लिए दिया जाता है।
एंटीबायोटिक्स
जैसे पेनिसिलिन या एरिथ्रोमाइसिन, संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए दिए जाते हैं।
अस्पताल में भर्ती
गंभीर मामलों में मरीज को अस्पताल में भर्ती करना पड़ सकता है, जहां उन्हें सांस लेने में मदद के लिए ऑक्सीजन या वेंटिलेटर की आवश्यकता हो सकती है।
संक्रमण की रोकथाम
संक्रमित व्यक्ति को दूसरों से अलग रखें ताकि संक्रमण और ज्यादा न फैले।
बचाव के उपाय
डिप्थीरिया से बचने का सबसे प्रभावी तरीका DPT (डिप्थीरिया, टेटनस, पर्टुसिस) वैक्सीन है। यह टीका जन्म से 16 साल तक के बच्चों को लगाया जाता है और इसे लगवाना अत्यंत आवश्यक है।
राजस्थान में बढ़ते डिप्थीरिया मामलों के बीच स्वास्थ्य विभाग द्वारा जागरूकता फैलाना और बच्चों का टीकाकरण कराना बेहद जरूरी है, ताकि इस जानलेवा बीमारी से बचाव संभव हो सके।
