क्या आपको तीखा खाना पसंद है या आप इसे नापसंद करते हैं? यह सवाल एक नई चीनी-अमेरिकी स्टडी का केंद्र बिंदु है, जिसने लोगों की स्वाद की पसंद और नापसंद के पीछे के कारणों की खोज की है। इस स्टडी ने यह जानने का प्रयास किया है कि कुछ लोग मसालेदार खाने का आनंद लेते हैं, जबकि अन्य इसे कष्टकारी मानते हैं।

दिमाग और तीखेपन का संबंध

इस स्टडी में प्रमुख रूप से मिर्च के सक्रिय घटक कैप्साइसिन का स्टडी किया गया है, जो जीभ पर दर्द रिसेप्टर्स को उत्तेजित करता है। इससे दिमाग को तीखेपन का अहसास होता है। लेकिन यहां पर रिएक्शन का भिन्नता है, जो शोधकर्ताओं के लिए एक आश्चर्य का विषय बना।

उम्मीदों की भूमिका

शोध से पता चला है कि सकारात्मक उम्मीदें मसाले की तीव्रता को कम कर सकती हैं, जिससे खाने का आनंद बढ़ता है। वहीं नकारात्मक उम्मीदें दर्द की भावनाओं को बढ़ा सकती हैं। पीयर-रिव्यूड जर्नल पीएलओएस बायोलॉजी में प्रकाशित इस स्टडी में वैज्ञानिकों ने कहा, उम्मीदें हमारी धारणा को आकार देती हैं, जो यह निर्धारित करती हैं कि हम अपने चारों ओर की दुनिया को कैसे समझते हैं।

स्टडी का आधार

इस स्टडी में ईस्ट चाइना नॉर्मल यूनिवर्सिटी, वर्जीनिया टेक, यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्कले और वेक फ़ॉरेस्ट यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ़ मेडिसिन की टीम ने प्रतिभागियों के बीच हॉट सॉस के प्रति प्रतिक्रियाओं का स्टडी किया। प्रमुख लेखक यी लुओ ने बताया, “मैं इस बात से हैरान था कि लोग एक ही शारीरिक अनुभूति को कैसे भिन्न-भिन्न तरीकों से अनुभव करते हैं।”

सकारात्मक और नकारात्मक अपेक्षाएं

शोध में प्रतिभागियों को अलग-अलग तीव्रता वाली हॉट सॉस दी गई, और उनसे अपने संवेदी अनुभवों का मूल्यांकन करने के लिए कहा गया। fMRI स्कैनिंग के माध्यम से यह देखा गया कि कैसे मसाले के स्तर ने प्रतिभागियों की प्रतिक्रियाओं को प्रभावित किया।

पॉजिटिव उम्मीदों वाले प्रतिभागियों में मस्तिष्क के आनंद से जुड़े हिस्सों में अधिक गतिविधि दिखाई गई, जबकि नकारात्मक उम्मीदों वाले प्रतिभागियों में दर्द से संबंधित मस्तिष्क गतिविधि बढ़ी। लुओ ने कहा, यह देखकर हैरानी हुई कि नकारात्मक उम्मीदें मस्तिष्क की दर्द प्रतिक्रिया को कितना बढ़ा सकती हैं, भले ही उत्तेजना समान हो।

निष्कर्ष और भविष्य की दिशा

इस स्टडी ने यह स्पष्ट किया है कि खाने की तीव्रता के प्रति हमारे अनुभव, हमारी उम्मीदों से प्रभावित होते हैं। जो लोग मसालेदार खाना पसंद करते हैं, उनके लिए एक पूर्वानुमानित संकेत से मस्तिष्क के आनंद से संबंधित क्षेत्रों में गतिविधि बढ़ जाती है।

लुओ का कहना है कि यह स्टडी हमें यह समझने में मदद करता है कि उम्मीदें हमारे संवेदी अनुभवों को कैसे आकार देती हैं। यह संभावित रूप से दर्द प्रबंधन और उपचारात्मक परिणामों को बेहतर बनाने के लिए नई रणनीतियों को प्रेरित कर सकता है।

इस प्रकार इस स्टडी ने यह स्पष्ट किया है कि हमारी स्वाद की पसंद और नापसंद केवल शारीरिक अनुभव नहीं हैं, बल्कि मानसिक अपेक्षाओं और धारणा से भी गहराई से जुड़ी हुई हैं।

By tnm

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