हाल ही में अमेरिका की नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) द्वारा जारी की गई एक रिसर्च ने कोविड-19 संक्रमण के दीर्घकालिक प्रभावों पर नई रोशनी डाली है। इस अध्ययन में पाया गया है कि कोविड-19 के संक्रमण के बाद हार्ट अटैक, स्ट्रोक और मौत का खतरा तीन साल तक बढ़ा रह सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जिन्होंने वैक्सीन नहीं ली है।
रिसर्च के निष्कर्ष
रिसर्च में उन लोगों को शामिल किया गया जो पहले से दिल की बीमारियों से ग्रसित थे और जो संक्रमित नहीं हुए थे। अध्ययन से स्पष्ट हुआ कि कोविड-19 संक्रमण दिल की समस्याओं का खतरा बढ़ाता है। यह पहली बार है जब यह बताया गया है कि यह खतरा संक्रमण के तीन साल बाद तक भी बना रह सकता है। खासतौर पर जो लोग महामारी की पहली लहर में संक्रमित हुए थे, उन्हें दिल की बीमारियों का दोगुना खतरा था। गंभीर कोविड-19 मामलों में यह खतरा लगभग चार गुना अधिक था।
विशेषज्ञों की राय
एनआईएच के डॉ. डेविड गोफ ने कहा कि यह रिसर्च कोविड-19 के लंबे समय तक रहने वाले हार्ट रोगों और उनके प्रभावों की गंभीरता को दर्शाती है। उन्होंने आगे कहा कि इन निष्कर्षों की पुष्टि के लिए और अधिक रिसर्च की आवश्यकता है, ताकि उन लोगों में हार्ट रोग को रोकने के लिए रणनीतियां विकसित की जा सकें, जिन्होंने कोविड-19 के गंभीर मामले झेले हैं।
ब्लड ग्रुप का प्रभाव
रिसर्च ने ब्लड ग्रुप और गंभीर कोविड-19 रोगियों में हार्ट अटैक या स्ट्रोक के बढ़ते जोखिम के बीच संभावित जेनेटिक संबंधों का भी अध्ययन किया। परिणामों से पता चला कि A, B या AB ब्लड ग्रुप वाले व्यक्तियों में कोविड-19 के बाद हार्ट अटैक या स्ट्रोक होने की संभावना दोगुनी से भी अधिक थी। जबकि O ब्लड ग्रुप वाले व्यक्तियों में यह खतरा कम था।
कोविड-19 के संक्रमण का वैश्विक दृष्टिकोण
एक्सपर्ट्स के अनुसार दुनिया भर में एक अरब से ज्यादा लोग कोविड-19 से संक्रमित हो चुके हैं। अध्ययन के अनुसार कोविड-19 रोगियों में हार्ट संबंधी घटनाओं का जोखिम दोगुना था और गंभीर बीमारियों वाले लोगों के लिए यह जोखिम चार गुना अधिक था। तीन साल के फॉलो-अप के दौरान यह जोखिम स्थिर रहा। कई बार यह जोखिम टाइप 2 शुगर जैसे अन्य जोखिम कारकों के बराबर या उससे अधिक था।
