दुनिया भर में खान-पान की परंपराएं भिन्न-भिन्न होती हैं, लेकिन वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड (WWF) की एक नई रिपोर्ट के अनुसार भारतीय खान-पान का तरीका धरती के लिए सबसे बेहतर है। यह रिपोर्ट लिविंग प्लैनेट रिपोर्ट के रूप में प्रकाशित हुई है, जिसमें बताया गया है कि भारत का खानपान जलवायु परिवर्तन के लिहाज से अत्यधिक प्रभावी है।
खान-पान और पर्यावरण का संबंध
मन में सवाल आ सकता है कि खान-पान का धरती की सेहत से क्या संबंध हो सकता है। इसका उत्तर इस तथ्य में छिपा है कि हम क्या खा रहे हैं और उसे कैसे तैयार कर रहे हैं। खाना बनाने की प्रक्रिया में ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन धरती की सेहत को प्रभावित करता है। WWF की रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि भारत में खान-पान की आदतें बड़े अर्थव्यवस्थाओं (G20) के देशों में सबसे अधिक पर्यावरण के अनुकूल हैं।
2050 तक भारत का खान-पान
रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि अगर 2050 तक सभी देश भारत के खान-पान के तरीके को अपनाते हैं, तो पर्यावरण को न्यूनतम नुकसान होगा। यदि ऐसा होता है, तो हमें अपनी खाने की जरूरतों को पूरा करने के लिए 0.84 धरतियों की आवश्यकता होगी। इसके विपरीत, अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका जैसे देशों के खान-पान से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन इतना बढ़ जाएगा कि हमें अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए सात पृथ्वी की आवश्यकता होगी।
भारत का मिलेट मिशन
रिपोर्ट में भारत के मिलेट मिशन की भी सराहना की गई है। इसे इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि यह मोटे अनाजों की खपत को बढ़ावा देता है, जो न केवल सेहत के लिए अच्छे हैं बल्कि जलवायु परिवर्तन के खिलाफ भी मजबूत हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि अगर हम मोटे अनाजों को अपनाते हैं, तो हमें खाने के लिए ज्यादा भूमि की जरूरत नहीं पड़ेगी।
अन्य देशों की स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार अर्जेंटीना का खानपान सबसे खराब है, जिसमें हमें 7.4 धरतियों की आवश्यकता होगी। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया (6.8), अमेरिका (5.5), ब्राजील (5.2), फ्रांस (5), इटली (4.6), कनाडा (4.5) और ब्रिटेन (3.9) का नंबर आता है। भारत (0.84) के बाद इंडोनेशिया (0.9), चीन (1.7), जापान (1.8) और सऊदी अरब (2) भी बेहतर स्थिति में हैं।
प्रोटीन के विकल्प
रिपोर्ट में प्रोटीन के अन्य विकल्पों को बढ़ावा देने की बात भी कही गई है, जैसे कि दालें, पौष्टिक अनाज, पौधों से बनने वाला मीट और पोषक तत्वों से भरपूर एल्गी (शैवाल)। ये विकल्प न केवल हमारे आहार को संतुलित रखते हैं, बल्कि पर्यावरण के लिए भी लाभकारी हैं।
