बच्चेदानी निकलवाना एक कॉम्पिलिकेटेड प्रक्रिया है। इसे निकलवाने के पीछे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं, जैसे बच्चेदानी से जुड़ी कोई गंभीर बीमारी हैवी ब्लीडिंग होती है। इससे जुड़ा कैंसर आदि बच्चेदानी के निकलवाने के बाद अक्सर महिलाओं को मेनोपॉज जैसे लक्षण नजर आते हैं। इस दौरान महिलाओं को हॉट फ्लैशेज, नाइट स्वेट्स आदि समस्याएं का सामना करना पड़ता है हालांकि जैसे-जैसे वक्त गुजरता है बॉडी खुद को एड्जेस्ट कर लेती है। इस तरह की परेशानियां भी कम हो जाती हैं लेकिन, हर महिला के लिए यह जानना जरूरी है कि क्या बच्चेदानी निकलवाने के बाद महिलाओं का शरीर एस्ट्रोजन का उत्पादन करता है? आइए जानते हैं इस आर्टिकल के जरिए।
क्या बच्चेदानी निकलवाने के बाद महिलाओं का शरीर एस्ट्रोजन हार्मोन का उत्पादन करेगा?
एक्सपर्ट्स के अनुसार, महिलाओं के लिए एस्ट्रोजन एक महत्वपूर्ण हार्मोन है। इस हार्मोन की मदद से मेंस्ट्रुअल साइकिल बैलेंस्ड रहती है, प्रेग्नेंसी अच्छे से होती है और महिलाएं फर्टाइल भी रहती हैं। यही नहीं एस्ट्रोजन हार्मोन महिलाओं के लिए इतना जरूरी है कि इसकी वजह से महिलाओं की हड्डियां मजबूत होती हैं कोलेस्ट्रॉल का स्तर संतुलित रहता है। जहां तक सवाल इस बात का है कि क्या बच्चेदानी निकलवाने के बाद महिलाओं का शरीर एस्ट्रोजन हार्मोन का उत्पादन कर सकता है। इस बारे में एक्सपर्ट का कहना है कि एस्ट्रोजन का उत्पादन कम होगा या नहीं यह बात बच्चेदानी की सर्जरी पर निर्भर करता है।

अगर महिला की सिर्फ बच्चेदानी निकाली गई है लेकिन ओवरीज अब भी हेल्दी हैं तो शरीर में हार्मोनल उतार-चढ़ाव हो सकते हैं लेकिन समय के साथ-साथ यह अपने स्तर को बैलेंस करने लगेगा। आपको बता दें कि बच्चेदानी की सर्जरी कई तरह की होती है जैसे बच्चेदानी के साथ-साथ सर्विक्स को रिमूव करना वहीं कुछ महिलाओं में सिर्फ बच्चेदानी को रिमूव किया जाता है जबकि सर्विक्स इंटेक्ट को छोड़ दिया जाता है। कुछ महिलाओं में बच्चेदानी की सर्जरी के साथ-साथ ओवरीज को भी रिमूव करना पड़ता है। जब बच्चेदानी और ओवरीज रिमूव हो जाती हैं तो अक्सर महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन रिलीज नहीं होता है। ऐसे में महिलाओं को सर्जरी के बाद से ही मेनोपॉज के लक्षण झेलने पड़ सकते हैं।
बच्चेदानी की सर्जरी के बाद एस्ट्रोजन कम होने के लक्षण
आपको यह साफ कर दें कि बच्चेदानी की सर्जरी के बाद अक्सर जो लक्षण महिलाओं में नजर आते हैं वे ट्रीटेबल नहीं होते हां, एक्सपर्ट की मदद से उन लक्षणों के प्रभाव को कुछ हद तक कम किया जा सकता है। आइए, जानते हैं इसके लक्षणों के बारे में।
. हॉट फ्लैशेज
. वजाइनल डिस्कंफर्ट
. नींद आने में समस्या

. अर्ली मेनोपॉज
. कमजोर याददाश्त
. मासंपेशियों में कमजोरी आना।
बच्चेदानी के बाद लो एस्ट्रोजन के स्तर को ऐसे करें मैनेज
एस्ट्रोजन का स्तर यदि महिलाओं के शरीर में कम हो तो महिलाओं को अपनी जीवनशैली में हेल्दी चीजों को शामिल करना चाहिए, जैसे।
. एस्ट्रोजन रिच फूड अपनी डाइट में शामिल करें। ब्रोकली, बंदगोभी, फ्लैक्स सीड और सीसम सीड का सेवन करें।
. एस्ट्रोजन का स्तर बैलेंस करने के लिए जरूरी है कि आप अपनी लाइफस्टाइल में हेल्दी आदतों को अपनाएं जैसे अपने वजन को बढ़ने न दें, नियमित रूप से एक्सरसाइज करें और तनाव का स्तर कम करें।

. एस्ट्रोजन के स्तर को संतुलित बनाए रखने के लिए पूरी नींद जरुरी है। ऐसे में ध्यान रखें कि जब महिलाएं पूरी नींद नहीं लेती हैं तो इससे उनकी सेहत पर बुरा असर हो सकता है, जिससे एस्ट्रोजन का स्तर और कम हो जाता है। नतीजतन उन्हें स्वास्थ्य से जुड़ी अन्य समस्याएं हो सकती हैं।
. आप बच्चेदानी की सर्जरी के बाद एस्ट्रोजन के स्तर को बैलेंस करने के लिए एक्सपर्ट की सलाह पर सप्लीमेंट ले सकती हैं। इससे भी एस्ट्रोजन को मैनेज करने में मदद मिलेगी।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
