आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर कोई एक हेल्दी और निरोगी जीवन की तलाश में है। लेकिन क्या स्वस्थ जीवन जीना वाकई इतना कठिन है जितना हम समझते हैं? मशहूर आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु का कहना है कि ऐसा बिल्कुल नहीं है। यदि आप अपने जीवन में कुछ सरल बदलाव लाते हैं, तो आप 90 प्रतिशत बीमारियों से खुद को बचा सकते हैं। उन्होंने इसके लिए सिर्फ दो प्रमुख उपायों पर जोर दिया है। सद्गुरु का मानना है कि यदि हम अपने शरीर का सही तरह से इस्तेमाल करें और एक सक्रिय जीवनशैली अपनाएं, तो अधिकांश बीमारियों को दूर रखा जा सकता है।
शरीर का सही इस्तेमाल: स्वस्थ जीवन का आधार
सद्गुरु के अनुसार हमारे शरीर को प्राकृतिक रूप से स्वस्थ रहने की क्षमता दी गई है, बशर्ते हम इसे पर्याप्त रूप से उपयोग में लें। उन्होंने कहा कि जब हम अपने शरीर को पूरी तरह से काम करने देते हैं, तो यह अपने आप निरोगी रहता है। उन्होंने यह भी बताया कि हमारे पूर्वज 200 साल पहले कैसे जीते थे और उस समय की जीवनशैली कैसी थी। वे उदाहरण देते हैं कि 200 साल पहले, लोग किसी प्रवचन को सुनने के लिए कई किलोमीटर पैदल चलते थे। यह पैदल चलना न सिर्फ उनका यात्रा का साधन था, बल्कि इससे उनका शरीर भी स्वस्थ रहता था। उस समय के लोग नियमित रूप से शारीरिक कार्य करते थे, जिससे उनका शरीर स्वाभाविक रूप से स्वस्थ रहता था।
आज के समय में, हालांकि तकनीकी विकास ने हमारे जीवन को आसान बना दिया है, इसने हमारी शारीरिक सक्रियता को भी काफी हद तक कम कर दिया है। अब हम ज्यादा से ज्यादा बैठकर काम करते हैं, जिससे हमारा शरीर निष्क्रिय हो जाता है। लेकिन अगर हम अपनी दिनचर्या में थोड़े से बदलाव लाएं और अपने शरीर का सही तरीके से इस्तेमाल करें, तो सद्गुरु के अनुसार हम 90 प्रतिशत बीमारियों से बच सकते हैं।
पहला तरीका: बैठे-बैठे भी कर सकते हैं व्यायाम

सद्गुरु ने इस बात पर जोर दिया कि आजकल ज्यादातर काम बैठकर ही किया जाता है, जिससे शरीर का पूरा उपयोग नहीं हो पाता। लेकिन वे यह भी बताते हैं कि आप बैठकर भी अपने शरीर को सक्रिय रख सकते हैं। उन्होंने कहा कि काम करते वक्त, आप अपने हाथों की मुट्ठी बार-बार खोलें और बंद करें। इससे न केवल आपके हाथों की मांसपेशियों को फायदा मिलेगा, बल्कि यह आपके शरीर में ऊर्जा का संचार भी करेगा। अगर आप पूरे दिन में इस क्रिया को 1000 बार दोहराते हैं, तो केवल 30 दिनों के अंदर आप खुद को पहले से कहीं ज्यादा ऊर्जावान महसूस करेंगे।
यह छोटा सा व्यायाम किसी भी समय, कहीं भी किया जा सकता है और इसके लिए आपको किसी विशेष उपकरण की आवश्यकता नहीं होती। आप इसे ऑफिस में, घर में या किसी भी जगह कर सकते हैं। यह एक आसान और प्रभावी तरीका है जो आपको अपने शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करेगा। इस प्रकार का व्यायाम न केवल शरीर को सक्रिय रखता है, बल्कि मानसिक तनाव को भी कम करता है।
दूसरा तरीका: आसान विकल्पों को छोड़ें

सद्गुरु ने एक और सरल तरीका बताया जिससे आप अपने शरीर का ज्यादा से ज्यादा उपयोग कर सकते हैं। वे बताते हैं कि हमें अपने जीवन में आसान विकल्पों को छोड़ना चाहिए, जैसे कि लिफ्ट की बजाय सीढ़ियों का इस्तेमाल करना। उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभव को साझा करते हुए कहा कि एक बार वे किसी कार्यक्रम में गए थे, जहां उन्हें बार-बार ऊपर-नीचे जाने की जरूरत थी। उस दिन उन्होंने 125 बार सीढ़ियों पर चढ़ाई की और इसके बाद वे खुद को बहुत ही ऊर्जावान महसूस करने लगे। उन्होंने कहा कि जितना अधिक आप अपने शरीर का इस्तेमाल करेंगे, उतना ही यह स्वस्थ रहेगा।
पहले के लोग, जो अधिक शारीरिक श्रम करते थे, वे आज के लोगों से कहीं अधिक स्वस्थ थे। पहले के समय में लोग 60 साल की उम्र में भी कठिन शारीरिक कार्य कर सकते थे, जबकि आज 20 साल का युवा भी उतना काम नहीं कर पाता। इसका कारण यह है कि आजकल की जीवनशैली में हम अपने शरीर का पर्याप्त उपयोग नहीं कर पाते।
सेहत का सीधा फॉर्मूला: सक्रिय रहें, स्वस्थ रहें

सद्गुरु के अनुसार, सेहत किसी मेडिकल प्रक्रिया पर आधारित नहीं है, बल्कि यह जीवनशैली से जुड़ी हुई है। जितना आप अपने शरीर का इस्तेमाल करेंगे, उतना ही यह आपको स्वस्थ रखेगा। उन्होंने यह भी बताया कि यदि आप इन दो सरल उपायों को अपनाते हैं—शरीर को सक्रिय रखना और आसान विकल्पों को छोड़ना—तो आप 90 प्रतिशत बीमारियों से बच सकते हैं।
शेष 10 प्रतिशत बीमारियों को आप स्वस्थ खानपान और सही जीवनशैली से नियंत्रित कर सकते हैं। सद्गुरु के अनुसार, स्वस्थ जीवन जीने के लिए आपको केवल अपने शरीर का सही उपयोग करने की आवश्यकता है। जब आपका शरीर सक्रिय रहेगा, तो आपकी जीवनशक्ति भी ऊर्जावान बनी रहेगी।
यह साधारण और प्रभावी दृष्टिकोण हर किसी के लिए सुलभ है। बस अपने जीवन में थोड़े से बदलाव लाकर आप खुद को अधिक स्वस्थ और ऊर्जावान बना सकते हैं।
