प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को पीरियड्स क्यों नहीं होते हैं, यह एक सामान्य सवाल है जो अक्सर लोगों के मन में आता है। मासिक धर्म महिलाओं के शरीर का एक नियमित चक्र है, जो हर 28 से 35 दिनों के भीतर आता है। इस दौरान गर्भाशय की परत टूटकर शरीर से बाहर निकलती है, जिसे हम पीरियड्स के रूप में जानते हैं। लेकिन जब महिला गर्भवती हो जाती है, तब यह चक्र रुक जाता है। आइए जानते हैं इसके पीछे की वजह और इससे जुड़ी जानकारी।
प्रेग्नेंसी में क्यों नहीं होते पीरियड्स
गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शरीर में कई बदलाव होते हैं, जिनमें सबसे प्रमुख है गर्भाशय की परत का बने रहना। जब एक महिला गर्भवती होती है, तो गर्भाशय की परत टूटने के बजाय बनी रहती है ताकि भ्रूण के विकास के लिए अनुकूल वातावरण मिल सके। इस कारण ब्लीडिंग नहीं होती और पीरियड्स भी नहीं आते। डिलीवरी के बाद महिलाओं को 30 से 45 दिनों के भीतर पीरियड्स आने लगते हैं, जिसमें शरीर से अनचाहा खून बाहर निकलता है। यही नहीं कुछ महिलाओं को ब्रेस्टफीडिंग के दौरान हार्मोनल बदलावों की वजह से भी पीरियड्स देरी से आ सकती है।
प्रेग्नेंसी के दौरान पीरियड्स होना खतरनाक
गर्भावस्था के दौरान पीरियड्स होना एक खतरनाक संकेत हो सकता है। पहले ट्राइमेस्टर में हल्की स्पॉटिंग होना सामान्य माना जाता है, लेकिन अगर इसके बाद ब्लीडिंग होती है, तो यह मिसकैरेज का संकेत हो सकता है। इस स्थिति में तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना आवश्यक होता है।
पीरियड्स के दौरान ब्लीडिंग होने के कुछ अन्य कारणों में गर्भाशय ग्रीवा पॉलिप का बढ़ना, समय से पहले डिलीवरी का खतरा, गर्भाशय ग्रीवा में संक्रमण, और प्रेग्नेंसी के दौरान यौन संबंध बनाना शामिल हो सकते हैं। अगर गर्भवती महिला को इस दौरान ब्लीडिंग होती है, तो उसे पेट दर्द, बुखार, ठंड लगना, बेहोशी या चक्कर आने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।
क्या करें अगर प्रेग्नेंसी में ब्लीडिंग हो
गर्भावस्था के दौरान किसी भी तरह की ब्लीडिंग को हल्के में नहीं लेना चाहिए। जैसे ही ब्लीडिंग होती है, तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए और जांच करवानी चाहिए। इससे गर्भ में पल रहे शिशु और मां की सेहत को सुरक्षित रखा जा सकता है।
