अक्सर छोटे बच्चे न समझ होते हैं और वह जाने अनजाने अपने मुंह में कुछ भी डाल लेते हैं, जिस वजह से कई बार उनके जान पर बन आती है। ऐसे में माता-पिता को अपने छोटे बच्चों पर खास ध्यान देने की जरूरत है। दरअसल हाल ही में गुजरात के सूरत शहर से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसमें डेढ़ साल की एक मासूम बच्ची ने गलती से पानी समझकर डीजल पी लिया, जिसके कारण उसकी तबीयत बिगड़ गई और अंततः उसकी मौत हो गई। बच्ची की मौत के बाद परिवार में मातम छाया हुआ है, और परिजन इस दुखद घटना से सदमे में हैं।
क्या है पूरा मामला
यह दर्दनाक हादसा सूरत के वराछा इलाके में 12 सितंबर को हुआ। बच्ची का नाम साकेबा था, और उसके पिता खालिक शेख एक कंपनी में मजदूरी करते हैं। खालिक बिहार के रहने वाले हैं और नौकरी के सिलसिले में सूरत आए हुए थे। परिवार के साथ कंपनी में ही रहने वाले खालिक के कमरे में एक बोतल में डीजल रखा हुआ था, जिसे मासूम साकेबा ने खेलते समय गलती से पानी समझकर पी लिया।
तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल में भर्ती
डीजल पीने के तुरंत बाद साकेबा जोर-जोर से रोने लगी, जिससे घरवाले और पड़ोसी तुरंत सतर्क हो गए। पड़ोसियों ने बिना देर किए एंबुलेंस बुलवाई और बच्ची को तत्काल सूरत के सिमिमेर अस्पताल में भर्ती कराया गया। लेकिन उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे सूरत सिविल अस्पताल रेफर कर दिया, जहां उसका इलाज करीब 10 दिनों तक चला। हालांकि बच्ची की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ और अंततः 23 सितंबर को उसकी मौत हो गई।
माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल
साकेबा की मौत के बाद उसके माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है। पिता खालिक शेख ने बताया कि साकेबा उनकी इकलौती संतान थी, और उसकी मौत ने परिवार की खुशियां छीन ली हैं। खालिक का कहना है कि बच्ची के जन्म के लिए उन्होंने बहुत मन्नतें मांगी थीं, लेकिन इस दुर्घटना ने उनकी सारी खुशियां छीन लीं।
पुलिस जांच जारी
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस की एक टीम अस्पताल पहुंची और बच्ची के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने घरवालों से घटना की पूरी जानकारी ली है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिससे मौत की असली वजह साफ हो सकेगी। पुलिस का कहना है कि प्राथमिक तौर पर यह हादसा डीजल पीने की वजह से हुआ है, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही इसकी पुष्टि की जाएगी।
यह दुखद घटना एक बार फिर से यह सिखाती है कि घर में रखे खतरनाक पदार्थों को बच्चों की पहुंच से दूर रखना कितना जरूरी है।
