गुजरात के अहमदाबाद में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां नरोड़ा स्थित एक प्राइवेट अस्पताल में 35 हजार रुपये लेकर गर्भ परीक्षण (जेंडर टेस्ट) किया जा रहा था। यह कार्य पीसी-पीएनडीटी (Pre-Conception and Pre-Natal Diagnostic Techniques Act) कानून का उल्लंघन है, जो गर्भ में पल रहे शिशु के लिंग परीक्षण पर प्रतिबंध लगाता है। इस मामले की जानकारी एक शिकायत के माध्यम से मिली, जिसके बाद जिला स्वास्थ्य अधिकारी और डॉक्टर्स की एक टीम ने इस अवैध गतिविधि पर कार्रवाई की।

डमी ग्राहक ने जुटाए सबूत

यह मामला तब उजागर हुआ जब स्वास्थ्य अधिकारियों ने एक डमी ग्राहक का सहारा लिया। यह व्यक्ति गर्भ परीक्षण कराने के बहाने अस्पताल पहुंचा और उसने डॉक्टर की गतिविधियों को अपने मोबाइल में रिकॉर्ड किया। इन रिकॉर्ड किए गए सबूतों को स्वास्थ्य विभाग और जिला पंचायत के अधिकारियों को सौंपा गया, जिनके आधार पर कार्रवाई की गई। टीम ने मौके पर पहुंचकर गर्भ परीक्षण में इस्तेमाल होने वाली मशीन को सील कर दिया।

स्वास्थ्य अधिकारी का बयान

अहमदाबाद के जिला स्वास्थ्य अधिकारी शैलेश परमार ने बताया कि गर्भ परीक्षण करना कानूनन अपराध है। उन्हें नरोड़ा के इस प्राइवेट अस्पताल में गर्भ परीक्षण किए जाने की शिकायत मिली थी, जिसके बाद उनकी टीम ने ठोस सबूत जुटाए। उन्होंने कहा कि “35 हजार रुपये में गर्भ परीक्षण किए जाने की पुष्टि हो चुकी है। हम इस मामले की और भी गहनता से जांच कर रहे हैं कि कितने समय से यह अवैध कार्य चल रहा था और इसमें और कौन-कौन शामिल था।”

डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई

इस मामले में जिस गायनेक डॉक्टर पर गर्भ परीक्षण का आरोप लगा है, उनके खिलाफ पीसी-पीएनडीटी कानून के तहत कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इस कानून के तहत किसी भी डॉक्टर को गर्भ परीक्षण करने की अनुमति नहीं है, और अगर वह ऐसा करते हैं, तो उन पर कानूनी कार्रवाई होती है। अस्पताल में लगे उपकरण को भी सील कर दिया गया है, जिससे भविष्य में इस प्रकार की अवैध गतिविधियां रोकी जा सकें।

पिछले 20 सालों से कार्रवाई जारी

यह पहली बार नहीं है जब अहमदाबाद में इस प्रकार की घटना सामने आई है। जिला पंचायत पिछले 20 वर्षों से इस प्रकार के मामलों में सक्रिय रही है और अब तक 15 से अधिक गर्भ परीक्षण मशीनें सील की जा चुकी हैं। इसके बाद संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया चलाई जाती है, और अगर कोर्ट द्वारा दोषी ठहराया जाता है, तो मेडिकल एसोसिएशन उस डॉक्टर का लाइसेंस रद्द कर देता है।

समाज के लिए खतरा

गर्भ परीक्षण को लेकर यह अवैध व्यापार न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि यह समाज में लिंग अनुपात को भी गंभीर रूप से प्रभावित करता है। भारत में गर्भ परीक्षण पर प्रतिबंध का मुख्य उद्देश्य कन्या भ्रूण हत्या को रोकना है, जो कि समाज में लैंगिक असमानता और अन्य सामाजिक समस्याओं को जन्म देती है। ऐसे मामलों पर कड़ी नजर रखनी आवश्यक है ताकि इस प्रकार की गतिविधियों को जड़ से समाप्त किया जा सके।

By tnm

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