आंध्र प्रदेश के प्रसिद्ध तिरुपति बालाजी मंदिर के लड्डू में जानवरों की चर्बी मिलाने का मामला सामने आया है, जिसने पूरे देश में हड़कंप मचा दिया है। चंद्रबाबू नायडू सरकार की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक मंदिर में भक्तों को बांटे जाने वाले प्रसादम, यानी लड्डू में इस्तेमाल किए गए घी में 3 प्रकार के एनिमल फैट (जानवरों की चर्बी) मिली है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि लड्डू में इस्तेमाल किए गए घी में भैंस की चर्बी, मछली का तेल और सूअर की चर्बी पाई गई है।

यह मुद्दा इसलिए गंभीर है क्योंकि तिरुपति मंदिर दुनियाभर के श्रद्धालुओं का केंद्र है और यहां की धार्मिक परंपराओं में इन लड्डुओं का विशेष महत्व होता है। लेकिन अब जब मंदिर के लड्डू में ही मिलावट की बात सामने आई है, तो यह चिंता का विषय बन गया है कि आम लोगों के घरों में इस्तेमाल होने वाले घी में भी कहीं एनिमल फैट तो नहीं मिलाया जा रहा है।

फॉरेन फैट क्या होता है

जब किसी डेयरी प्रोडक्ट में नॉन-डेयरी सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है, तो उसे फॉरेन फैट कहा जाता है। उदाहरण के तौर पर बाज़ार में बिकने वाले शुद्ध देसी घी में भी कई बार वेजिटेबल ऑइल, एनिमल फैट, या हाइड्रोजेनेटेड ऑइल मिलाया जाता है। इसके अलावा नकली घी में एसेंस मिलाकर उसे शुद्ध घी जैसा दिखाने की कोशिश की जाती है, जिससे लोग असली और नकली घी के बीच अंतर नहीं कर पाते।

बीफ टैलो, लार्ड, और फिश ऑयल

बीफ टैलो भैंस, बकरी, और गाय जैसे जानवरों की चर्बी को कहते हैं, जिसे घी की तरह तैयार किया जाता है। लार्ड सूअर की चर्बी होती है, और फिश ऑयल समुद्री मछलियों से निकाला जाने वाला तेल है। तिरुपति लड्डू में इसी तरह की सामग्री पाई गई है, जिसे सेहत के लिए खतरनाक माना जाता है।

एनिमल फैट के नुकसान

विदेशों में एनिमल फैट का इस्तेमाल आम है, लेकिन इसमें बैड कोलेस्ट्रॉल की अधिक मात्रा होती है। इसे खाने से हार्ट अटैक, स्ट्रोक, मोटापा और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। एनिमल फैट का लंबे समय तक सेवन नसों को ब्लॉक कर सकता है, जिससे शरीर को गंभीर नुकसान हो सकता है।

कैसे पहचानें मिलावटी घी

सूंघने की विधि

असली और नकली घी की पहचान का सबसे आसान तरीका है इसे सूंघना। बड़े-बुजुर्ग घी की खुशबू से उसकी शुद्धता का अंदाजा लगा सकते हैं।

कागज पर घी फैलाएं

एक चम्मच घी सफेद कागज पर फैला दें। अगर कुछ देर बाद कागज पर धब्बा दिखे, तो इसमें मिलावट है, क्योंकि शुद्ध घी दाग या धब्बा नहीं छोड़ता।

सल्फ्यूरिक एसिड टेस्ट

एक चम्मच घी में डायल्यूट सल्फ्यूरिक एसिड डालें। अगर रंग गहरा लाल हो जाए, तो समझें कि इसमें वनस्पति तेल मिला हुआ है।

रूम टेम्परेचर पर घी जम जाए

अगर घी कमरे के तापमान पर जम जाता है, तो इसमें मिलावट हो सकती है।

गर्मी पर घी की जांच

एक चम्मच घी को गर्म करें। अगर इससे जलने की बदबू आती है, तो इसमें एनिमल फैट मिला हुआ है। शुद्ध घी पिघल जाएगा, लेकिन इससे कोई जलने की बदबू नहीं आएगी।

तिरुपति लड्डू में एनिमल फैट का मामला एक गंभीर चिंता का विषय है। उपभोक्ताओं को सतर्क रहने की जरूरत है और घी की शुद्धता की जांच के लिए उपरोक्त तरीकों का इस्तेमाल करना चाहिए।

By tnm

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