स्किन कैंसर तब होता है जब त्वचा की कोशिकाओं में असामान्य वृद्धि शुरू हो जाती है, जो मुख्य रूप से पराबैंगनी (UV) किरणों के संपर्क में आने से होता है। यह दुनिया भर में तेजी से बढ़ने वाली बीमारियों में से एक है, और अगर समय पर पहचान हो जाए तो इसका इलाज भी संभव है। स्किन कैंसर के शुरुआती लक्षणों में त्वचा पर नए उभार या धब्बे आना, त्वचा की वृद्धि में आकार, रंग या बनावट में बदलाव शामिल होते हैं। समय रहते इस बीमारी को पकड़ लेने पर सर्जरी, क्रायोथेरेपी और कीमोथेरेपी जैसी तकनीकों से इसका सफल इलाज किया जा सकता है।
किन लोगों को स्किन कैंसर का ज्यादा खतरा
खेत मजदूर, माली, और बिल्डिंग मजदूर
जो लोग लंबे समय तक धूप में काम करते हैं, जैसे खेत मजदूर, माली, और बिल्डिंग के निर्माण में काम करने वाले लोग, उन्हें गैर-मेलेनोमा त्वचा कैंसर का खतरा अधिक होता है। धूप में लंबे समय तक रहने से उनकी त्वचा पर UV किरणों का गहरा असर होता है, जो स्किन कैंसर का प्रमुख कारण बन सकता है।
गोरी त्वचा वाले लोग
जिन लोगों की त्वचा का रंग गोरा होता है, उन्हें भी स्किन कैंसर का खतरा अधिक रहता है। इन लोगों में मेलेनिन की मात्रा कम होती है, जो UV किरणों से त्वचा की सुरक्षा करता है। गोरी त्वचा धूप में जल्दी झुलसती है, जिससे कैंसर की संभावना बढ़ जाती है।
फैमिली हिस्ट्री
जिनके परिवार में पहले से किसी को स्किन कैंसर हो चुका है, उन्हें भी इसका खतरा अधिक होता है। परिवार की जेनेटिक संरचना के कारण यह बीमारी पीढ़ी दर पीढ़ी चल सकती है।
हल्के रंग के बाल और आंखों वाले लोग
जिनके बाल लाल या हल्के रंग के होते हैं, उन्हें भी स्किन कैंसर का खतरा ज्यादा रहता है। इसके साथ ही जिनकी आंखों का रंग हल्का होता है, जैसे नीला या हरा, उन लोगों की त्वचा UV किरणों के प्रति ज्यादा संवेदनशील होती है।
टैनिंग बेड और सन लैंप का उपयोग
जो लोग टैनिंग बेड या सन लैंप का उपयोग करते हैं, उन्हें भी स्किन कैंसर का खतरा अधिक होता है। ये उपकरण भी UV किरणें उत्पन्न करते हैं, जो त्वचा की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती हैं।
कमजोर इम्युनिटी
जिन लोगों की इम्यूनिटी कमजोर होती है, उन्हें भी स्किन कैंसर का खतरा अधिक रहता है। इम्यून सिस्टम कमजोर होने पर शरीर का कैंसर कोशिकाओं से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है।
पानी में आर्सेनिक
जिन लोगों के पीने के पानी में आर्सेनिक की मात्रा अधिक होती है, उन्हें भी स्किन कैंसर का खतरा हो सकता है। आर्सेनिक एक जहरीला तत्व है जो लंबे समय तक शरीर में रहने से कैंसर की बीमारी हो सकती है।
बेसल सेल कार्सिनोमा के कारण
बेसल सेल कार्सिनोमा स्किन कैंसर का सबसे आम रूप है, जो मुख्य रूप से सूरज की हानिकारक UV किरणों के लंबे समय तक संपर्क में आने से होता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार जो लोग लंबे समय तक धूप में रहते हैं या टैनिंग बेड का उपयोग करते हैं, उन्हें इस कैंसर का खतरा अधिक होता है। बेसल सेल कार्सिनोमा अक्सर चेहरे, नाक, माथे, होंठ, गाल, गर्दन और कानों पर गुलाबी या लाल रंग के बंप के रूप में दिखने लगता है। यह घाव या मस्से के रूप में भी उभर सकता है और अगर समय पर इलाज न किया जाए तो यह घाव फटकर खून तक बहने लगता है।
इसलिए अगर आपको अपनी त्वचा पर कोई असामान्य उभार, घाव या मस्सा दिखाई दे, तो इसे नज़रअंदाज़ न करें। समय रहते डॉक्टर से सलाह लेकर इसका इलाज कराना बेहद जरूरी है, ताकि समय रहते इस गंभीर बीमारी से बचा जा सके।
