कैंसर को अक्सर एक जानलेवा बीमारी माना जाता है, लेकिन समय पर इसके लक्षणों की पहचान और उचित देखभाल से इससे बचा जा सकता है। हाल ही में आई एक नई रिपोर्ट ने कैंसर के बढ़ते खतरे को लेकर चिंता बढ़ा दी है, खासकर 1965 से 1996 के बीच जन्में लोगों के लिए। यह पीढ़ी, जिसे जेन जेड (Gen Z) और मिलेनियल्स (Millennials) के नाम से जाना जाता है, को 17 प्रकार के कैंसर का अधिक खतरा बताया गया है। कैंसर को अक्सर एक जानलेवा बीमारी माना जाता है, लेकिन समय पर इसके लक्षणों की पहचान और उचित देखभाल से इससे बचा जा सकता है। आइए जानते हैं कि यह खतरा किन कैंसर प्रकारों से जुड़ा है और इससे बचने के उपाय क्या हो सकते हैं।
17 प्रकार के कैंसर जिनका खतरा अधिक है
रिपोर्ट के अनुसार जेन जेड और मिलेनियल्स को 17 प्रकार के कैंसर का अधिक खतरा है। जिसमें कोलोरेक्टल कैंसर, एंडोमेट्रियल कैंसर, पेनक्रियाटिक कैंसर, किडनी कैंसर, लिवर कैंसर, थायराइड कैंसर, गॉल ब्लैडर कैंसर, मल्टीपल मायलोमा कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर शामिल है। इसके अलावा ल्यूकेमिया, नॉन-हॉजकिन लिंफोमा, ओवेरियन कैंसर, गैस्ट्रिक कैंसर, भोजन-नली का कैंसर, ब्रेन कैंसर, सर्वाइकल कैंसर, ओरल और फैरिंजीयल कैंसर भी शामिल है।
जेन जेड और मिलेनियल्स में कैंसर का जोखिम क्यों अधिक है
जीरो फिजिकल एक्टिविटी
फिजिकल एक्टिविटी की कमी से शरीर में मोटापा और अन्य बीमारियां बढ़ने का खतरा रहता है, जो कैंसर के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं।
खराब आहार और फास्ट फूड
प्रोसेस्ड और फास्ट फूड का अत्यधिक सेवन भी कैंसर के जोखिम को बढ़ाता है। इन खाद्य पदार्थों में ट्रांस फैट, चीनी, और रसायनों की अधिकता होती है, जो शरीर में असंतुलन पैदा करती है।
वायु प्रदूषण और रसायनों का संपर्क
वायु प्रदूषण, रसायनों से युक्त पानी और भोजन, और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से निकलने वाले रेडिएशन भी कैंसर के खतरे को बढ़ाने में योगदान करते हैं।
लेट प्रेगनेंसी
इस पीढ़ी के लोग प्रेगनेंसी को देर से प्लान कर रहे हैं, जिससे ब्रेस्ट और ओवेरियन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
जेनेटिक म्यूटेशन टेस्ट
जेनेटिक म्यूटेशन टेस्ट का ज्यादा करवाना भी कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जिनके परिवार में कैंसर की हिस्ट्री है।
कैंसर से बचने के उपाय
फिजिकल एक्टिविटी करें
स्वस्थ आहार लें
रेगुलर हेल्थ चेकअप करवाएं
केमिकल्स से बचाव
जेनेटिक काउंसलिंग करें
समय पर सावधानी बरतने से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचाव संभव है, और इसके जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
