अगर आपके घर में भी कोई टीबी का पेशेंट है तो ये खबर आप जरूर पड़े। दरअसल हाल ही में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने एक नई किफायती तकनीक विकसित की है, जो क्षय रोग (टीबी) के निदान में न केवल समय की बचत करेगी, बल्कि लागत भी काफी कम करेगी। आईसीएमआर के डिब्रूगढ़ (असम) स्थित क्षेत्रीय केंद्र द्वारा विकसित की गई इस तकनीक की मदद से केवल 35 रुपये में टीबी की जांच की जा सकती है। इस तकनीक में रोगी की लार का इस्तेमाल कर ढाई घंटे के भीतर टीबी का सटीक पता लगाया जा सकता है।
एक बार में 1500 से ज्यादा नमूनों की जांच
टीबी एक घातक और संक्रामक बीमारी है, के त्वरित निदान के लिए सटीक और किफायती तकनीक की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। आईसीएमआर की इस नई तकनीक के बारे में बताया गया है कि इसमें तीन चरणों में परीक्षण होता है और एक बार में करीब 1500 से ज्यादा नमूनों की जांच की जा सकती है। यह विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है, जहां स्वास्थ्य सेवाओं की सीमित उपलब्धता के चलते टीबी का प्रभावी तरीके से प्रबंधन मुश्किल हो जाता है।
जांच करने में प्रभावी
टीबी के लिए मौजूदा निदान तकनीकें जैसे कल्चर, माइक्रोस्कोपी, और न्यूक्लियक एसिड आधारित विधियां आमतौर पर महंगी, समय लेने वाली और जटिल होती हैं। उदाहरण के लिए कल्चर तकनीक में टीबी निगेटिव की पुष्टि के लिए 42 दिन का समय लगता है। दूसरी ओर आईसीएमआर की यह नई प्रणाली समय और लागत दोनों को काफी हद तक कम करती है। इस तकनीक के जरिए टीबी की जांच में केवल ढाई घंटे का समय लगता है और इसकी संवेदनशीलता और सटीकता भी उच्च स्तर की है।
नई तकनीक का विकास जरूरी
एक अधिकारी ने इस नई प्रणाली के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि टीबी एक वैश्विक स्वास्थ्य चुनौती है, जो प्रभावी रोग प्रबंधन के लिए सटीक और त्वरित निदान की मांग करता है। वर्तमान में उपयोग होने वाली पद्धतियों में संवेदनशीलता, विशिष्टता, गति और लागत के मामले में कुछ सीमाएं हैं। इसलिए इस नई तकनीक का विकास अत्यधिक आवश्यक था।
जानें इस तकनीक के बारे में
आईसीएमआर ने इस तकनीक के व्यावसायीकरण के लिए पात्र संस्थाओं, कंपनियों और मैन्युफैक्चरिंग से टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के लिए लेटर ऑफ इंटरस्ट आमंत्रित किए हैं। यह तकनीक A CRISPR केस आधारित टीबी निदान प्रणाली पर आधारित है, जिसे आईसीएमआर का क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र डिब्रूगढ़ उत्पादन के विभिन्न चरणों में मार्गदर्शन और तकनीकी सहयोग प्रदान करेगा।
इस पहल का उद्देश्य
इस पहल का उद्देश्य टीबी के निदान को सुलभ और किफायती बनाना है, जिससे देश भर में इस बीमारी के खिलाफ लड़ाई को एक नई दिशा मिल सके। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक टीबी से प्रभावित क्षेत्रों में एक बड़ा बदलाव ला सकती है, जिससे लाखों लोगों को समय पर इलाज मिल सकेगा और टीबी के प्रसार को नियंत्रित किया जा सकेगा।
