मिजोरम ने हाल ही में वैश्विक स्तर पर फैल रहे मंकीपॉक्स के खतरे को देखते हुए सतर्कता बढ़ा दी है। राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने एक मुख्य समिति का गठन किया है, जिसका उद्देश्य इस वायरस से निपटने के लिए कारगर रणनीतियां तैयार करना है। यह निर्णय पिछले शुक्रवार को हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में लिया गया। इस बैठक में यह भी तय किया गया कि मुख्य समिति के तहत कई विशेष समूह काम करेंगे, जो इस वायरस के संक्रमण से बचाव और इलाज के उपायों पर काम करेंगे।
मिजोरम में राज्य-स्तरीय समिति की नियुक्ति
इसके साथ ही मिजोरम में एक राज्य-स्तरीय समिति भी गठित की जाएगी, जो उच्च अधिकारियों के समन्वय में कार्य करेगी। इस बैठक के दौरान राज्य के इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम (IDSP) के नोडल अधिकारी डॉ. वनलालरेंगपुइया ने मंकीपॉक्स के वैश्विक प्रसार पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने विभिन्न देशों में तेजी से बढ़ रहे मंकीपॉक्स के मामलों पर चर्चा की और इससे बचाव, उपचार और तैयारी के महत्व को रेखांकित किया।
भारत को किया मंकीपॉक्स को लेकर अलर्ट
भले ही भारत में अभी तक मंकीपॉक्स के कोई मामले सामने नहीं आए हैं, डॉ. वनलालरेंगपुइया ने वैश्विक यात्रा के चलते वायरस के भारत में प्रवेश की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए सतर्क रहने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, मिजोरम के एकमात्र मेडिकल कॉलेज, जोराम मेडिकल कॉलेज (ZMC) को भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) द्वारा एक सेंटिनल साइट के रूप में नामित किया गया है। ZMC को पूरे भारत के 28 टॉप लैब्स में से एक के रूप में चुना गया है और दिसंबर 2023 से यहां सेंटिनल साइट योजना को लागू किया जा रहा है। इसके अलावा लुंगलेई के सिविल अस्पताल को भी एक अतिरिक्त सेंटिनल साइट के रूप में उपयोग किए जाने की उम्मीद है।
मंकीपॉक्स को लेकर फैली अफवाहों को किया दूर
इसी बीच सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया कि सियाहा की एक लड़की को मंकीपॉक्स नहीं, बल्कि चिकनपॉक्स हुआ था। लड़की को एलसीएमसी लवंगतलाई में 13 अगस्त को भर्ती किया गया था और 20 अगस्त को छुट्टी दे दी गई। स्वास्थ्य विभाग ने जनता से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर गलत जानकारी न फैलाएं और अनावश्यक रूप से घबराहट न पैदा करें।
